पूरनपुर। हजारा क्षेत्र के गांव कबीरगंज में बलविंदर के घर में घुसकर बाघ ने बुधवार रात बछिया को मार डाला। शोर-शराबा पर बाघ बछिया के शव को समीप के गन्ना के खेत में खींच ले गया। बाघ को ट्रैंक्युलाइज कराने के लिए लखीमपुर से विशेषज्ञों को बुला लिया गया।
इसी बाघ ने 28 अगस्त को गांव शांतीनगर के मुंशी प्रसाद पर उस समय हमला कर मार डाला था, जब वे केले का खेत देखने गए थे। बाघ को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने की अनुमति 18 सितंबर को मिली थी। 19 सितंबर से अभियान शुरू किया गया। गांव कबीरगंज में गन्ना के खेत के समीप मचान बनाया गया। खीरी उत्तरी से आए ट्रैंक्युलाइज विशेषज्ञ डॉ. दया और डॉ. तल्हा उसको ट्रैंक्युलाइज करने की कोशिश में जुटे रहे। हाथी भी मंगवाए गए। ताकि हाथियों पर सवार होकर विशेषज्ञ बाघ को ढूंढते रहे। मगर बाघ नहीं मिला।
ट्रैंक्युलाइज कर बाघ को पकड़ने की समय सीमा तीन अक्तूबर शाम को समाप्त होने के बाद हाथी और टीम लौट गई थी। बाघ की निगरानी लगातार की जाती रही। बुधवार रात को गांव कबीरगंज के बलविंदर के घर में घुसकर बाघ ने बाड़े में बंधी बछिया को मार डाला। शोर-शराबा पर बाघ बछिया के शव को घसीटता हुआ गन्ना के खेत में ले गया। सूचना पर पहुंची टीम को बाघ के पंजों के निशान मिले।
टीम को गन्ना के खेत में बछिया का अधखाया शव और बाघ की मौजूदगी मिली। संपूर्णानगर रेंजर ललित कुमार ने बताया कि बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने के लिए पूर्व में दोबारा मांगी गई अनुमति बृहस्पतिवार शाम तक मिलने की उम्मीद है। इसके लिए अफसरों से संपर्क किया गया है। विशेषज्ञ डॉ. दया और डॉ. तल्हा को बुला लिया गया है। बाघ की निगरानी कराई जा रही है।
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