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Pilibhit News: मरम्मत के नाम पर लीपापोती, कटी नहर अब भी बदहाल

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चितरपुर गांव के सामने फटी पड़ी सब्सिडियरी हरदोई ब्रांच नहर। संवाद
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वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले बजट खपाने की जल्दबाजी, शारदा खंड की अहम नहरों पर खतरा बरकरार
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कलीनगर। तहसील क्षेत्र में सिंचाई विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले नहरों और ड्रेनों की मरम्मत के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जा रही हैं। वर्षों से कटी पड़ी अहम नहर की सुध तक नहीं ली गई है। इससे क्षेत्र के किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
शारदा डैम से निकलने वाली प्रदेश की महत्वपूर्ण नहरों के बाहरी हिस्सों में सीपेज रोकने के लिए बनी ड्रेनों की मरम्मत इस बार सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह गई है। केवल लीपापोती कर काम पूरा दिखाया जा रहा है। तहसील का बाईफरकेशन क्षेत्र, जिसे सिंचाई विभाग का प्रमुख जंक्शन माना जाता है। अंग्रेजी शासनकाल में विकसित किया गया था। यहां से शारदा मुख्य नहर के माध्यम से प्रदेश के करीब डेढ़ दर्जन जिलों की लाखों एकड़ भूमि की सिंचाई होती है। इतनी अहम व्यवस्था होने के बावजूद नहरों की हालत चिंताजनक बनी हुई है।
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बताया जाता है कि नहरों के दोनों किनारों पर सीपेज के पानी को फैलने से रोकने के लिए बनाई गई ड्रेनों की हर साल सफाई और खोदाई के नाम पर बड़ा बजट खर्च किया जाता है, लेकिन इस बार कार्य केवल खानापूरी तक सीमित रहा। शारदा मुख्य नहर के दोनों ओर सफाई के नाम पर सतही काम किया गया।
शारदा डैम से निकली सहायक सब्सिडियरी हरदोई ब्रांच नहर, जो आपात स्थिति और सूखे के समय प्रदेश के कई जिलों को पानी उपलब्ध कराती है। वह भी लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है। करीब तीन साल पहले कलीनगर क्षेत्र के चित्तरपुर गांव के पास नहर कटान का शिकार हो गई थी। तब से लेकर अब तक उसकी स्थायी मरम्मत नहीं कराई गई।
किसानों का आरोप है कि विभाग करोड़ों रुपये नहरों के सुदृढ़ीकरण के नाम पर खर्च कर चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। हाल ही में नए सहायक अभियंता के आने पर किसानों ने घेराव कर नाराजगी जताई थी। उस समय अधिकारियों ने हल्द्वानी से तकनीकी टीम बुलाकर स्थायी समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन वित्तीय वर्ष समाप्ति के करीब आने के बावजूद स्थिति जस की तस है।
कटान रोकने के नाम पर रेत से अस्थाई इंतजाम का खेल
मौजूदा समय में कटान रोकने के नाम पर नहर के किनारों पर पड़ी रेत को डालकर अस्थायी बंदोबस्त किया गया है, जिसे किसान पानी छोड़े जाने के बाद एक-दो दिन में टूटने की आशंका जता रहे हैं। इतना ही नहीं, कई स्थानों पर नहर के अंदरूनी हिस्सों से अवैध रूप से रेत खनन कर कटिंग की जा रही है, जिससे नहर और कमजोर हो रही है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारी और कर्मचारी मौके पर नजर नहीं आते।
कागजों में जेसीबी से कटिंग रोकने और सफाई दिखाकर बजट खर्च किया जा रहा है। सब डिवीजन मुख्यालय बाईफरकेशन में होने के बावजूद अधिकतर समय बंद रहता है। स्थानीय कर्मचारियों के भरोसे ही पूरी व्यवस्था चल रही है, जबकि बड़े काम ठेकेदारों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। ऐसे में प्रदेश की महत्वपूर्ण नहरों की स्थिति भगवान भरोसे नजर आ रही है।
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कटान रोकने के हो रहे प्रयास : अवर अभियंता
अवर अभियंता शांतनु कुमार ने बताया कि सब्सिडियरी हरदोई ब्रांच में पानी छोड़े जाने से पहले कटान रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। हल्द्वानी की टीम भी निरीक्षण कर चुकी है। संवाद
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