बांकेगंज। बारिश के साथ ही दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में कटरुआ (जंगली फल) की बहार आ गई है। साल के पेड़ों के नीचे प्राकृतिक रूप से कटरुआ निकलने शुरू हो गए हैं। डीटीआर के एफडी ने फील्ड कर्मियों को कटरुआ के लिए जंगल में घुसपैठ करने वालों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
बरसात शुरू होते ही दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी, भीरा समेत किशनपुर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के शारदा नगर, गोला, महेशपुर रेंज में साल के जंगल में कटरुआ निकलने लगता है। इसे हिरन, पाढ़ा, चीतल, भालू, बंदर, लंगूर आदि वन्यजीव बड़े चाव से खाते हैं। इससे उन्हें भरपूर प्राकृतिक प्रोटीन मिलता है। वहीं इंसानों को भी कटरुआ बहुत पसंद आता है। जैसे ही इसका सीजन शुरू होता है, जंगल के आसपास बसे ग्रामीण वन क्षेत्र में घुसपैठ करके कटरुआ बीनने लग जाते हैं।
शनिवार को पुलिस ने महेवागंज क्षेत्र में नौ बोराें में ढाई क्विंटल कटरुआ के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार कर वन विभाग को सौंप दिया। कटरूआ बाजार में ऊंची कीमत पर बिकता है। इसके चलते गांव के लोग अपनी जान जोखिम में डाल देते हैं।
900 से लेकर एक हजार रुपये प्रति किलो बिक रहा कटरुआ
तराई के जंगल में बरसात के मौसम में निकलने वाला कटरुआ इस समय जंगल से सटी बाजारों आने लगा है। हालांकि, बाजार में अभी यह काफी कम मात्रा में आ रहा है। भरपूर प्रोटीन से युक्त यह विशेष प्रकार का जंगली फल 900 से एक हजार रुपये किलो तक बिक रहा है। महंगा होने के बाद लोग इसे बड़े शौक से खरीद रहे हैं। काले और सफेद रंग के गोल कंचे के आकर का यह कटरुआ बेहद पौष्टिक होता है। हालांकि जंगल के अंदर घुसकर कटरुआ बीनना प्रतिबंधित है, बावजूद इसके लोग इसे बीनने के लिए जंगल में जाते हैं। इस पर अंकुश लगाना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होती है।
कटरुआ है प्राकृतिक मशरूम
पूर्व वन क्षेत्राधिकारी और पर्यावरणविद अशोक कुमार कश्यप का कहना है कि जंगल में निकलने वाला कटरुआ प्राकृतिक मशरूम है। इसमें व्यवसाय के तौर पर उगाए गए मशरूम के सापेक्ष जंगल में प्राकृतिक रूप से निकलने वाले कटरुआ में प्रोटीन कई गुना मात्रा में पाया जाता है।
वर्जन
कटरूआ बीनने के लिए जंगल में घुसपैठ करने वालों पर वन कर्मियों को कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। हिदायत के बाद भी यदि अवैध रूप से जंगल में कोई जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. एच राजामोहन,फील्ड डायरेक्टर,दुधवा टाइगर रिजर्व