पीलीभीत। मानव तस्करी के सुगम रास्तों के लिए जिला जब-तब चर्चा में रहता है लेकिन मानव तस्करी रोकने के लिए बनाई गई एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल के पास कोई काम नहीं है। दो साल में इस थाने में एक भी मामला पंजीकृत नहीं किया गया। इस दौरान यहां नियुक्त स्टाफ ने बिलसंडा थाने में दर्ज एक मामले की विवेचना जरूर की है।
इंडो-नेपाल सीमा पर अक्सर नेपाल, बिहार और पश्चिम बंगाल से लड़कियों और महिलाएं लाकर बेचे जाने की सूचना आती रहती है। इसे रोकने के लिए दूसरे जिलों की तरह 2012 में यहां भी सेल खोली गई थी। सेल में जीडी समेत सभी अभिलेख, कंप्यूटर, वाहन आदि संसाधन उपलब्ध कराए गए लेकिन लोगों की इस सेल के बारे में जानकारी ही नहीं है।
सिर्फ स्थानांतरित मामले की विवेचना
11 नवंबर 2013 को बिलसंडा थाने में बंगाल की एक महिला को 15 हजार रुपये में बेचने का मामला दंपति समेत चार लोगों के खिलाफ दर्ज हुई थी। मामले की विवेचना मानव तस्करी सेल को स्थानांतरित कर दी गई। मामले की विवेचना कर थाना बिलसंडा के गांव भितैरा निवासी रामचंद्र, उसकी पत्नी विमला देवी और उसके भाई बनवारी लाल के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई थी। तीनों आरोपी जेल में हैं, जबकि चौथे आरोपी पूरनलाल निवासी महोलिया का नाम-पता तस्दीक नहीं हुआ और न ही उसका कोई पता चला।
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19 पीबीटीपी 02
जीडी समेत समेत सभी अभिलेख हैं, लेकिन थाने पर पीड़ित नहीं आते हैं। इसलिए पिछले दो साल से कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। बालश्रम के एक-दो मामले श्रम कल्याण अधिकारी के साथ दुकानों और होटलों में छापामारी कर निपटाए गए हैं।
- परमानंद कलेर, एसओ, थाना मानव तस्करी सेल