पीलीभीत। शहर में बृहस्पतिवार सुबह सात बजे जब बूथों पर वोट डालने की शुरूआत का समय था तब गैस चौराहा के पास एक पथरीली सड़क पर युवाओं का झुंड क्रिकेट खेल रहा था। मौका मिला तो वोट का सवाल हुआ। समूह में शामिल आनंद ने जवाब दिया कि अभी सारा दिन बाकी है पहले खेलेंगे फिर वोट डालेंगे। यहां गली से कुछ सीनियर सिटीजन हाथों में पहचानपत्र थामे पोलिंग स्टेशन की ओर जाते दिखे।
करीब आठ बजे छिपियान मस्जिद चौराहा। दिलचस्प नजारा। सड़क पर युवा और बूढे़ तो थे कुछ बीच के उम्र के भी थे। पांच से 15 साल के बच्चे चुनावी उत्सव का पूरा आनंद लेते दिखे। महिलाओं के समूह यह बताने के लिए काफी थे कि हमारे लोकतंत्र में आधी आबादी किसी से पीेछे नहीं हैं। बूथों के बाहर बड़ी तादाद में पुलिस के जवान लोगों को सड़क छोड़ने के लिए डंडा फटकारते दिखे।
नई तहसील समय दस बजे। कुनबे के साथ वोट डालने आए करमतुल्ला से माहौल पर सवाल हुआ तो बोले कि वोट डालकर लौटते तो बात होती है। लौटे से गोलमाल बात करने लगे। इस बीच बगल में खड़े उनके पोते नजाकत ने दादा की पोल खोल दी।
प्राथमिक विद्यालय शिफाखाना में 10.30 बजे सबसे ज्यादा भीड़ दिखी। यहां पर्दानशीनों समेत अन्य महिलाओं की लाइन लगी हुई थी। वोट डालकर निकली तरन्नुम से चुनावी समीकरण पर बात हुई तो बोली कि इस बार वोटर वोटिंग का रिकार्ड सुधारने का मन बन चुका है।
ड्रमंड इंटर कालेज कैंपस में 11.20 बजे कुछ सरकारी कर्मचारियों और नौजवानों के बीच चल रही बहस भी सुनने लायक रही। इस बहस में सीट का समीकरण, वोटिंग ट्रेंड और फिर रिजल्ट तक की बात थी। इसी बहस में शामिल थी फोन पर वोटिंग परसेंटेज की जानकारी, प्रत्याशियों की संभावित हार जीत के कारण और निवारण।