पीलीभीत। शुक्रवार को पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष की अगुवाई में यहां पहुंची सपा की सामाजिक न्याय रथ यात्रा आज रवाना हो गई। इससे पहले उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की अपील की।
शनिवार सुबह पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामआसरे विश्वकर्मा ने कार्यकर्ताओं की बैठक ली। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं का जोश बढ़ाते हुए लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार प्रसार तेज करने की अपील की। कहा कि, सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाएं। इसके बाद नौगवां चौराहा, असम चौराहा होते हुए रथयात्रा जहानाबाद क्षेत्र के बालपुर पहुंची। यहां कार्यकर्ताओं ने यात्रा में शामिल लोगों का फूल माला से स्वागत किया। इस मौके पर अनुचूचित जाति/जनजाति आयोग अध्यक्ष रामदुलार राजभर, रमेश प्रजापति, विश्वनाथ विश्वकर्मा, विकास जोगी, संजय सविता, ब्रजेश शर्मा, विजय सिंह पाल, राजेश विश्वकर्मा, रामकुमार कुसुम प्रजापति, जिलाध्यक्ष आनंद सिंह यादव, प्रत्याशी बुद्धसेन वर्मा, मोहन सिंह, राकेश मिश्रा, मेवाराम, विशाल वाल्मीकि, डॉ. सुलेमान, मुन्ने मियां अंजाना, योगेश्वर सिंह, अशर्फीलाल, सियाराम शर्मा, वीरेन्द्र पाल, अकबर अहमद, सरफुद्दीन नूरी, धर्मवीर आदि मौजूद रहे।
सपा ने जो कहा, वह किया: रामआसरे
पीलीभीत। पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष रामआसरे विश्वकर्मा ने शनिवार को प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कई जातियों के लोगों के पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस और भाजपा की सरकारों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में सपा सरकार की उपलब्ध्यिां गिनाईं। कहा कि, सपा की प्रदेश सरकार देश की पहली ऐसी सरकार है जिसने चुनाव में किए गए सारे वादे पूरे करके दिखाए। 20 हजार बेरोजगारों को भत्ता देने, 16 लाख युवाओें को लैपटॉप वितरित करने, कन्याओं को विद्याधन, अल्पसंख्यक छात्राओं को हमारी बेटी उसका कल योजना के तहत 20-20 हजार रुपये की सहायता और समाजवादी पेंशन योजना लागू करने के लिए सरकार की पीठ ठोंकी। उन्होंने बसपा पर पिछड़ों के लिए झूठा दिखावा करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस-भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए दोनों को किसान और अल्पसंख्यक विरोधी करार दिया। इसके अलावा सच्चर कमेटी की सिफारिशें लागू कराने के लिए केंद्र सरकार से मांग की। आगे कहा कि, कांग्रेस ने अल्पसंख्यकों को रिझाने के लिए सच्चर समिति से जांच करा ली, मगर अब सिफारिशें लागू करने से बच रही है। लोकसभा चुनाव के बाद मुलायम सिंह के नेतृत्व में तीसरे मोर्च की सरकार बनने का भी दावा किया।