पीलीभीत/ माधोटांडा। प्रदेश सरकार और सिंचाई विभाग के अभियंताओं की लापरवाही के कारण मिट्टी से बने 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम की सिंचाई क्षमता कम होने के बाद अब इससे पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर, बहराइच सहित आधा दर्जन जनपदों पर खतरा मंडराने लगा है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना से प्रदेश की लगभग 74930 हेक्टेयर असिंचित भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने को 22 किलोमीटर लंबे शारदा सागर डैम का निर्माण शुरू कराया गया था, जो वर्ष 1962 में बनकर तैयार हुआ था। इसकी ऊंचाई 630 फीट है और 399723 एकड़ में फैला हुआ है। डैम में कभी 623.5 फीट के लेबिल तक पानी भरा जाता था। डैम के बाहरी क्षेत्र में एक ओर नेपाल का बार्डर और पूर्वी क्षेत्र में बंगाली और पूर्वांचल से आए लोगों की आबादी बसी है। डैम का पांच किलोमीटर क्षेत्र उत्तराखंड में पड़ता है।
सिल्टिंग के कारण बांध के लिए खतरा बना हुआ है। डैम में पाइपिंग की समस्या पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि पाइप से पानी रिसकर ही बांध की नींव तक पहुंचाता है। इससे नींव की मिट्टी गीली होकर अपने स्थान से हट जाती है। दो दिन पूर्व डैम के बाहरी क्षेत्र में लीकेज से हड़कंप मच गया था। डैम में 619.80 फीट के पानी का लेबिल था। माना जा रहा था कि पानी के लेबिल के ऊपरी हिस्से से ही यह लीकेज हुई है। इसी कारण पानी का दबाव भी नहीं बढ़ सका। अन्यथा कोई भी अनहोनी हो सकती थी। डैम की जर्जर पिचिंग की मरम्मत तत्काल शुरू नहीं की गई तो पानी भरते समय स्थिति बिगड़ सकती है।
वर्जन...
डैम की सिल्ट-सफाई और क्षतिग्रस्त पिचिंग की मरम्मत को बजट मांगा है। बजट मिलते ही ठोस कार्य कराए जाएंगे।
जीवनराम यादव, अधिशासी अभियंता, शारदा सागर डैम।
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शारदा डैम का शेष बचा भाग कटने से दहशत
माधोटांडा। बाढ़ खंड द्वारा शारदा नदी का रुख मोड़ने और भू-कटान रोकने को नौजल्हा क्षेत्र में क्यूनिक खुदाई कर बनाए गए बंधे का काफी भाग कट जाने से ग्रामीण और अभियंता चिंतित हैं, क्योंकि यदि अब शारदा में बाढ़ आ जाती है तो नौजल्हा में बनाई गईं ठोकरों के पीछे से नदी निकल सकती है। अब बंधा का भाग बहने से नौजल्हा में बनी ठोकरों के अस्तित्व को भी खतरा पैदा हो गया है।