पूरनपुर। बाघ को ट्रैंकुलाइज कराने में महारत रखने वाली पवनकली और गंगाकली को पहले जैसी खुराक नहीं मिल रही है। गन्ना, चरी, गुड़ और आटे से ही इनको गुजारा करना पड़ रहा है। बुढ़ापे पर अब इनको आटा और चीनी के न तो लड्डू मिल रहे है और न ही देशी घी।
पवन कली साठ साल की जबकि गंगा कली पचास साल की हो गई है। बाघ की दुर्गंध कई मीटर से सूंघ कर दोनों हथनियां बाघ होने का एहसास करा देती है। बाघ को ट्रैंकुलाइज करने के दौरान बाघ का हमला भी पवन कली झेल चुकी है। जब से वह बाघ को देखते ही बिगड़ने लगती है। वन विभाग के सूत्रों की माने तो हथनियों को प्रतिदिन 15-15 किलोग्राम आटा, ढाई -ढाई किलोग्राम गुड़, तीन-तीन क्विंटल गन्ना, चार-चार क्विंटल चरी दी जा रही है। महावत इदरीस कहते हैं कि ट्रैंकुलाइज अभियान में दोगुनी डाइट दी जाती है। वे मानते है कि पहले हाथनियों को आटा-चीनी के लड्डू, आधा किलोग्राम देशी घी भी कभी-कभार दिया जाता था। सौ-सौ ग्राम सरसों का तेल हाथियों के सिर पर मालिश किया जाता था। बरसात के दिनों में सरसों और नीम के तेल से मालिश की जाती थी। इसके अलावा बरसाती बीमारियों से बचाने को टीकाकरण भी होता था।