पीलीभीत। बज्में सुखन की हुई नशिस्त में शायरों ने कलाम पेश किए। देर रात तक श्रोता शायरों के कलाम का लुत्फ उठाते रहे।
सदारत करते हुए नेमतउल्ला नेमत ने कहा-
बोलना बंद था पहले तो हमीं से उनका,
अब तो खुद से भी नहीं बोल रही हैं आंखें।
सरपरस्त डॉ शराफत उल्ला शिफा ने कहा-
ऐ शिफा डूबते सूरज से चमकना सीखो
चढ़ते सूरज से दीए अपने जलाते क्यों हो।
इरफान सागर ने कहा-
हैरत में हूं हर सिम्त यह मंजर क्यों सजा है
लगता है कि उन होंठों पे मिलने की दुआ है।
सैय्यद दिलरुबा अली ने कहा-
बेवफा ने मेरा दिल मुझको दिया यह कहके
एक अदना सी है यह चीज तुम्हारी रखिए।
जुल्फिकार नाजिश ने कहा-
जिस तरफ देखिए एक वहशत सी है
दूर इंसान से आज इंसान है।
डॉ असलम राना ने कहा-
हम चरागां किए बैठे रहे उम्मीद लिए
फिर भी आए न सनम देखने वालों देखो।
खुर्शीद कफगीर, अनस खां, सैय्यद जाहिद हुसैन आजम, मोहम्मद सरकार नियाजी, मोहम्मद आलम बड़े ने भी कलाम पेश किए। इस मौके पर आबिद रजा, शफीक कुरैशी, अली हसन, जावेद, अबरार व अब्बा जी सहित काफी लोग मौजूद रहे।
इंसेट
बज्में सुखन का सालाना मुशायरा मई माह में होगा। तिथि की घोषणा बाद में की जाएगी। बुधवार की रात्रि मोहल्ला तकिया स्थित इंतजार हुसैन के आवास पर हुई बैठक में बाहर से शायरों को बुलाने व मुशायरे की व्यवस्था के लिए संचालन समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। तय किया गया कि सालाना मुशायरे के संबंध में आठ मई महासचिव इरफान सागर के आवास पर एक बैठक और की जाएगी।