सारेगामा 1998 के फाइनल विजेता बाोले
पीलीभीत। संगीत एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया हैै, जिसका कभी अंत नहीं होता। जब कभी यह रुकता है तो इसके मायने खत्म हो जाते हैं। रियाज संगीत की आत्मा है। सारेगामा मेगा फाइनल 1998 के विजेता मोहम्मद वकील ने आज यह बात पत्रकार वार्ता में कही।
उप्र खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के तत्वावधान में यहां ड्रमंड राजकीय इंटर कालेज में चल रहे खादी महोत्सव में आए वकील ने पत्रकारों को बताया कि वह जयपुर के संगीत घराने की छठी पीढ़ी के नुमाइंदे हैं। उन्होंने प्रारंभिक संगीत की शिक्षा इस घराने से ताल्लुक रखने वाले अपने मामा भारत के मशहूर संगीतज्ञ अहमद हुसैन व मोहम्मद हुसैन से ली है। टीवी पर प्रसारित होने वाले सारेगामा के 1997 के वह फाइनल विजेता रहे।
उन्होंने 1998 के मेगा फाइनल में पहला स्थान पाया था। इसके बाद उन्होंने लगभग पांच एलबमों में काम किया है। सपने एलबम में आपसी मोहब्बत को आधार बनाते हुए सारेगामा के सभी विजेताओं को सम्मिलित करके बनाया गया था। गजल गायक गुलाम अहमद ने इनके एलबम मौला का दरबार, सोनू निगम ने एलबम गुजारिश को रिलीज किया था।
यश चौपड़ा ने अपनी फिल्म वीर-जारा में कव्वाली में प्रतिभाग का अवसर दिया। लता मंगेशकर और दिलीप कुमार के साथ हुई मुलाकात को वह अपनी जिदंगी का खूबसूरत क्षण मानते हैं। आज के संगीत कार्यक्रमों में कभी कभी प्रतिभागियों द्वारा कुछ ड्रामों को वह गलत मानते हैं। उनका कहना है कि संगीत व ड्रामा अलग अलग चीजे हैं। अपनी काबलियत के दम पर ही कोई मुकाम हासिल किया जा सकता है। भविष्य में उनका एक एलबम रिलीज होने वाला है। जिसमें कबीर, तुलसी व अमीर खुसरो की रचनाओं को सूफी अंदाज में पेश किया जाना है।