पीलीभीत। मनरेगा कार्यों की जांच के लिए सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके तहत सीबीआई ने डीएम से वर्ष 2007 से 2010 तक कराए गए कार्य और उस पर खर्च की गई धनराशि का ब्योरा तलब किया है। डीएम के निर्देश पर विभाग ने इसकी रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है।
वर्ष 2007 में शुरू हुए मनरेगा कार्यों में शुरू से ही गड़बड़ी की शिकायतें मिलने लगी थीं। प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिलने पर पहले सात जिलों में और बाद में सभी जिलों में हुए कार्यों की सीबीआई से जांच कराने के आदेश हाईकोर्ट ने दिए थे। इस आदेश में तीन साल के कार्यों क्रमश: वर्ष 2007-08, 2008-09 व 2009-10 के कार्यों की जांच होनी है। हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद सीबीआई ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके लिए सीबीआई ने डीएम से जिले में इन तीन वर्षों में मनरेगा से हुए कार्य, खर्च और आवंटित धनराशि का ब्योरा तलब किया है। सीबीआई का पत्र मिलने पर डीएम ने सीडीओ को रिपोर्ट तैयार करने को कहा है जिसपर सीडीओ एवं मनरेगा उपायुक्त कार्यालयों में काम तेज हो गया है। ब्लाकों से रिपोर्ट मांगी गई है। सभी ब्लाक से प्राप्त ब्योरा कंपाइल कर संयुक्त रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
जिले में वर्ष 2008 में शुरू हुई थी योजना
पीलीभीत। यूं तो मनरेगा योजना देश में वर्ष 2007-08 में शुरू हुई थी लेकिन जिले में इसका काम 2008-09 में शुरू हुआ था। जिसमें पहले वर्ष यानि 2008-09 में 20.16 करोड़ और दूसरे वर्ष 2009-10 में 70.35 करोड़ कुल 90.51 करोड़ के काम हुए थे।
राजीव गांधी सेवा केंद्र भी जद में
पीलीभीत। मनरेगा की सीबीआई जांच में तालाब एवं अन्य कच्चे कार्यों के साथ वर्ष 2008-09 में बनवाए गए राजीव गांधी सेवा केंद्र भी फंस सकते हैं। 27 करोड़ की लागत से जिले में 270 केंद्र बनने थे जिनकी धनराशि आवंटित कर दी गई लेकिन अभी भी कई केंद्र अधूरे हैं।
मनरेगा कार्यों की जांच के लिए सीबीआई ने ब्योरा मांगा है। जिले में वर्ष 2008-09 व 2009-10 में हुए कार्यों की रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। रिपोर्ट तैयार होने पर सीबीआई को भेजी जाएगी।
ओम नरायन सिंह, डीएम