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अतिक्रमणकारियों में हड़कंप, आधे से अधिक हट गई दुकानें
मुचलका पाबंद किए गए दुकानदारों की मुचलका की धनराशि जब्ती की शुरू की कार्रवाई
वीएम सिंह बोले, हाईकोर्ट ने स्टे कर सिविल कोर्ट में 48 घंटे में मामले को रखने को कहा
सिविल कोर्ट को उसी दिन मामले को डिसाइड करने के दिए निर्देश
नायब तहसीलदार ने बताया कि हाईकोर्ट ने निरस्त किया मामला
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। चेतावनी के बाद रामलीला मेला मैदान से बृहस्पतिवार को अतिक्रमणकारियों ने अपनी दुकानें हटाना शुरू कर दी। बृहस्पतिवार शाम तक अतिक्रमण कर लगाई गई आधे से अधिक दुकानों को हटा लिया गया। हालांकि शांतिभंग की आशंका में दस-दस लाख रूपये से मुचलका पाबंद किए गए अधिकांश दुकानदारों ने अभी दुकानें हटाना शुरू नहीं की हैं। पुलिस ने उक्त दुकानदारों के मुचलका पाबंद की धनराशि जब्ती की कार्रवाई शुरू कर दी है।
रामलीला मेला मैदान करीब साढ़े छह एकड़ में है। मैदान में ढाई सौ से अधिक व्यापारियों ने फड़ लगाकर कई ने पक्के निर्माण कर अतिक्रमण कर रखा था। प्रशासन ने अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण चार अक्तूबर तक हटाने की चेतावनी दी थी। शांती भंग की आशंका पर कोतवाली पुलिस ने 23 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ मुचलका पाबंद की संस्तुति कर रिपोर्ट एसडीएम कोर्ट भेजी। पुलिस की रिपोर्ट पर अतिक्रमणकारी 23 दुकानदारों को दस-दस लाख रुपये से मुचलका पाबंद किया गया। बुधवार की शाम को एसडीएम जेपी चौहान ने पुलिस, पीएसी के साथ मेला मैदान में घूमकर अतिक्रमणकारियों को बृहस्पतिवार तक अतिक्रमण हटा लेने की चेतावनी दी। चेतावनी पर घबराए अतिक्रमणकारियों ने आननफानन में दुकानें हटाना शुरू कर दिया। बृहस्पतिवार शाम तक अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों में करीब आधी दुकानें हटा ली गई। कोतवाल केशव कुमार तिवारी ने बताया कि जिन दुकानदारों के खिलाफ मुचलका पाबंद की कार्रवाई हुई, उसमें अधिकांश दुकानदारों ने अब तक दुकानें नहीं हटाई है। शांती भंग की आशंका पर अब मुचलका पाबंद किए गए लोगों की मुचलका पाबंद की धनराशि जब्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
इधर, बृहस्पतिवार को किसान नेता एवं पूर्व विधायक वीएम सिंह ने प्रेस को जारी बयान में बताया कि बृहस्पतिवार को हाईकोर्ट ने दुकानों में तोड़फोड़ आदि करने को लेकर स्टे कर सिविल कोर्ट में मामले को 48 घंटे में रखने की बात कही है। साथ ही सिविल कोर्ट को उसी दिन मामले को डिसाइड करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम जेपी चौहान ने कोर्ट के किसी आदेश की अथेंटिक सूचना से इनकार किया है।