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दीन दुखियो की सेवा करना ही सच्चा धर्म।

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खेकड़ा (बागपत)।
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बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि मनुष्य आज दान देने के साथ ही जो सेेवा करते हैं, उसमें भी स्वार्थ छिपा होता है। जो मनुष्य के लिए पतन का कारण बन जाता है।
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क्षेत्र के ग्राम डूूंडाहैडा स्थित श्री बालाजी धाम में महामंडलेश्वर भैयादास महाराज के सानिध्य में चल रही नर्मदा कथा के सातवें दिन बाल साध्वी राधा देवी ने कहा कि आज का प्राणी दान देता है, सेवा भी करता है, परंतु उसमें उसका निजी स्वार्थ भरा रहता है। और जहां स्वार्थ होता है, वहां धर्म नहीं होता। यह सब किए हुए कर्म में अकर्म बन जाते है। कोई माता पिता की सेवा करता है। तो उसमें भी उसका लालच छिपा हुआ है। भाई से प्रेम करता है तो उसमें भी लालच छिपा, कोई दीन दुखी की सेवा करता है तो उसमें भी बहुत लालच छिपा होता है। भगवान का कार्य निस्वार्थ किया जाता है। मंदिर में मनुष्य एक लोटा जल लेकर जाता है। और उस जल के बदले अपने सैकड़ों कार्यों की भगवान से प्रार्थना करता है। मनुष्य को स्वार्थ के बजाय धर्म मार्ग पर चलकर निस्वार्थ भाव एवं सच्चे मन से धार्मिक कार्य करने चाहिए। यही सच्ची मानवता एवं धर्म भक्ति कहलाती है।
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