दो धार में बंटी शारदा, बाएं किनारे की ओर भी बढ़ा खतरा
धुरिया-पलिया और रमनगरा में तबाही मचा रही नदी
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। शारदा नदी का कटान धुरिया पलिया और रमनगरा बाजार के सामने जारी है। नदी ने धुरिया पलिया में चार किसानों की तीन एकड़ कृषि भूमि का और कटान कर लिया है। वही रमनगरा बाजार के सामने नदी ने किसानों की दस एकड़ कृषि भूमि का कटान कर ठोकरों के नजदीक पहुंच रही है। धुरिया पलिया में नदी का धार पत्थर की बनी ठोकरों से 40 मीटर की दूरी पर पहुंच गई है। ठोकरों को बचाने के लिए विभाग द्वारा जियो बैग में रेत भरकर डलवाने का कार्य करवाया जा रहा है।
शारदा का कहर पिछले कई दिनों से धुरिया पलिया में जारी हैं। बीते 24 घंटों में नदी ने किसान सुल्लखन सिंह की एक एकड़ गन्ने की फसल, हरवंश सिंह की आधा एकड़ गन्ने, रंजीत सिंह की आधा एकड़ धान, मेवा सिंह की एक एकड़ गन्ने और दयाल सिंह की एक एकड़ धान की फसल को अपने आगोश में ले लिया। यहां शारदा की तबाही रोकने के लिये वर्षों पूर्व बनी पत्थर की ठोकरों से 40 मीटर की दूरी पर नदी की मुख्य धार का पानी पहुंच गया है। नदी के लगातार कटान कर आबादी की बढ़ने से धुरिया पलिया के ग्रामीणों को आबादी में तबाही होने का डर सताने लगा है। जिसके चलते बाढ़ खंड के अभियंताओं ने ठोकरों को बचाने के लिए जियो बैग में रेत भरकर बचाव कार्य करवाना शुरू कर दिया है। सहायक अभियंता ध्रुव नारायण मिश्रा ने बताया कि धुरिया पलिया में स्थिति पर नजर रखकर बचाव कार्य करवाए जा रहे हैं। रमनगरा बाजार में हो रहे कटान को दिखवाया जा रहा हैं।
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रमनगरा बाजार के सामने 10 एकड़ भूमि नदी में समाई
शारदा का कटान रमनगरा बाजार के सामने भी जारी हैं। यहां नदी ने किसान लखविंदर सिंह, कश्मीर सिंह, सिरा सिंह, श्रुति सिंह व बलविंदर सिंह सहित एक दर्जन किसानों की दस एकड़ भूमि को मय लहलहाती फसलों के अपने आगोश में ले लिया। नदी कटान कर पत्थर की बनी ठोकरों से टकरा रही है।
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बुझिया में बंद हुआ कटान
शारदा की धार का रुख रमनगरा बुझिया गांव से दूर हो गया है। जिसके चलते नदी ने रमनगरा बुझिया में भू कटान करना बंद कर दिया है। यहां कटान रुकने से बाढ़ खंड ने राहत की सांस ली है।
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दो धारों में बटी शारदा, खतरा बढ़ा
छह: नंबर स्पर के निकट शारदा दो धारों में तबदील हो गई है। नदी की एक धार दाएं और दूसरी धार बाएं किनारे की ओर जाने लगी है। जिससे बाएं किनारे की ओर भी कटान होने का खतरा बढ़ने लगा है। दो धारों में बटी शारदा के बीच का हिस्सा सूख गया हैं।