बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.72 लाख बच्चों को दैवीय आपदा के दौरान आत्मरक्षा करने और दूसरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम की मॉनीटरिंग को डीएम की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया जा चुका है।
प्रदेश में वर्ष 2005 में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू किया गया था। जिला स्तर पर इसकी जिम्मेदारी डीएम को सौंपी गई थी। अधिनियम के तहत आपदा के दौरान इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्यमी, आम नागरिक व एनजीओ को सहयोग करने के निर्देश भी जारी किए गए थे। जिले में आपदा प्रबंधन के नाम पर पिछले सालों में प्रशिक्षण कार्यक्रम भी हुए, लेकिन आपदा के दौरान यहां इस प्रशिक्षण का कोई असर होता नहीं दिखा। इधर अब केंद्र सरकार ने स्कूल सेफ्टी प्र्रोग्राम के तहत शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन के गुर सिखाने का निर्णय लिया है। इसको लेकर बकायदा डिजास्टर मैनेजमेंट गाइडलाइंस जारी की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. इंद्रजीत प्रजापति ने बताया कि जिले के सभी 1800 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। डीसी निर्माण पंकज शाक्य मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। इनके माध्यम से अब प्रत्येक ब्लॉक के एबीआरसी को प्रशिक्षित किया जाएगा। सभी एबीआरसी अपने-अपने क्षेत्रों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। उन्होेंने बताया कि स्कूल सेफ्टी प्रोग्राम के तहत प्रत्येक विद्यालय को एक प्रोफार्मा उपलब्ध कराया जाएगा। जिसमें शिक्षकों व बच्चों की संख्या, दिव्यांग बच्चों की संख्या, भवन निर्माण की तिथि, किचन, अग्निशमन यंत्र आदि की जानकारी भरकर देनी होगी।
प्रशिक्षण में दी जाएगी यह जानकारी
- आपदा के जोखिम में कमी
- परिणाम में कमी
- क्षमता का निर्माण
- आपात तैयारी
- राहत एवं बचाव