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कुल शरीफ में उमड़ा अकीदतमंदों का सैलाब

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पीलीभीत। कुतुबे पीलीभीत हजरत शाहजी मोहम्मद शेर मियां रहमतुल्लाह अलैह के 114वें सालाना उर्स शरीफ का कुल शरीफ के साथ समापन हो गया। बड़ी तादाद में अकीदतमंदों ने कुल शरीफ में शिरकत कर शाहजी मियां केे वसीलेे से दुआएं मांगीं। दरगाह से दूसरों की भलाई और बेहतरी करने का पैगाम देने के साथ ही मुल्क में अमन भाईचारा और तरक्की के लिए दुआ की गई। सज्जादानशीन ने दुआ की अहमियत बताते हुए कहा कि नबियों और वलियों के वसीले से दुआ करने से हर मुश्किल आसान होती है। सड़कों से लेकर दरगाह के आसपास के मोहल्लों की छतों से भी जायरीन दुआ के लिए हाथ उठाए दिखाई दिए।
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मंगलवार की सुबह फज्र की नमाज के बाद दरगाह शरीफ पर कुरआनख्वानी, हलका और शजरा पढ़ने के बाद पहले कुल शरीफ की फातेहा की गई। इसके बाद दरगाह शरीफ पर जायरीन ने हाजिरी देकर गुलपोशी की। जैसे-जैसे कुल शरीफ का समय नजदीक आता गया, अकीदतमंदों का सैलाब दरगाह की तरफ जाने वाले सभी रास्तों पर उमड़ने लगा। कुल शुरू होने से करीब एक घंटा पहले ही दरगाह पहुंचने वाले सभी रास्ते अकीदतमंदों की भारी भीड़ से खचाखच भर गए। ठीक सुबह 10 बजे बड़े कुल शरीफ की रस्म नात-ओ-मनकबत के साथ शुरू हुई। दूरदराज से आए लोगों ने नजराना-ए-अकीदत पेश किए। दरगाह की परंपरागत मीलाद पार्टी ने अपने अंदाज में कलाम पेश किए। इसके बाद शजरा पढ़ा गया। कुरआन पाक की आयते करीमा की तिलावत हुई। सज्जादानशीन हजरत अलहाज मुन्ने मियां शेरी ने लोगों को पैगाम देते हुए कहा कि अल्लाह तआला अपने बंदों से कहता है कि तुम मेरा जिक्र करो, मैं तुम्हारी फिक्र करूंगा। नबियों और वलियों से यही पैगाम हम तक पहुंचा है, इसलिए अल्लाह का जिक्र करते रहो, इसी में भलाई है। इसी में तरक्की और कामयाबी है। उन्होंने कहा कि शाहजी मियां हुजूर का भी यही पैगाम रहा। उन्होंने जिस तरह अल्लाह की इबादत और मां की खिदमत की, उन्हें अल्लाह ने न सिर्फ वली बल्कि पीलीभीत का कुतुब बना दिया। उन्होंने कहा कि नेक रास्ता अपनाओ, वलियों से मोहब्बत रखो और इस्लाम के उसूलों पर पाबंद रहो। वलियों और नबियों के वसीले से दुआ मांगो तो हर मुश्किल आसान होगी। तरक्की भी मिलेगी और कामयाबी भी। कुल शरीफ की रस्म पूरी होने के बाद जायरीन को तबर्रुक बांटा गया।
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गली-गली घर-घर हुआ कुल
शाहजी मियां के कुल शरीफ की रस्म अदा होने के बाद शहर भर में फातेहा दिलाई गईं। अकीदतमंदों ने मिठाई हलुवा आदि बांटा। दरगाह के अलावा अन्य जगहों पर भी अकीदतमंदों ने फातेहा की और लंगर बांटा।
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वक्त से पहले निपट गया सामान
फातेहा के लिए लोगों को मिठाई और फलों की खरीदारी करने के लिए मशक्कत करना पड़ी। कमल्ले चौराहा से बेला चौराहे तक मिठाई की जितनी दुकानें और फलों की रेहड़ियां लगती हैं, हर जगह खरीदारों की भारी भीड़ रही। इसके चलते सामान वक्त से पहले ही खत्म हो गया।
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मेले में हुई जमकर खरीदारी
उर्स शरीफ के मौके पर लगने वाले मेले में भी जायरीन ने जमकर खरीदारी की। भारी भीड़ के चलते रात दिन मेले में बड़े पैमाने पर सामानों की खरीदारी होती रही।
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उर्स के मौके पर स्कूल कॉलेज रहे बंद
हजरत अलहाज शाहजी मोहम्मद शेर मियां के 114वें उर्स के चलते मंगलवार को जिले के सभी सरकारी कार्यालय बंद रहे। वहीं जिले भर के स्कूल कॉलेज भी बंद रहे। डीएम शीतल वर्मा द्वारा मंगलवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था।
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दो पुस्तकों का हुआ विमोचन
पीलीभीत। उर्स-ए-शाहजी मियां रहमातुल्ला अलैह के मौके पर आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड की ओर से खानकाह नसीरिया शेरिया में हुई प्रेस कांफ्रेंस में इस्लामिक स्कालर मुफ्ती साजिद हसनी ने कुतुबे पीलीभीत हुजूर शाहजी मोहम्मद शेर मियां की रूहानी जिंदगी पर रोशनी डालते हुए कहा कि शाहजी मियां के दयार में आला हजरत इमाम अहमद रजा खान फाजिले बरेलवी रहमतुल्ला अलैह अक्सर शरफे मुलाकात के लिए आया करते थे। आला हजरत फाजिले बरेलवी और हुजूर शाहजी मोहम्मद शेर मियां हमेशा एक दूसरे की बड़ी इज्जत और एहतराम किया करते थे। कहा कि शाहजी मियां रोजाना पीलीभीत से अपने पीरो मुर्शीद सैय्यद अहमद अली शाह की खिदमत में भटपुरा शरीफ रामपुर जाया करते थे। रात में अपनी मां की खिदमत किया करते थे और दिन में अपने पीरो मुर्शिद की खिदमत किया करते थे। शाहजी मियां ने अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा खिदमत अपनी मां व पीरो मुर्शिद की की। शाहजी मियां को शेरे मुस्तफा का खिताब मिला। इस दौरान अरशद खान शेरी द्वारा लिखी गई पुस्तक सबान-ए-शेरे मुस्तफा व मुफ्ती साजिद हसनी द्वारा लिखी गई पुस्तक तजकिरय मुज्जद्दि अल्फसानी के नए एडीशन का विमोचन खानकाह के सज्जादानशीन हजरत नसीर मियां शेरी व हजरत मौलाना वजाहत मियां ने किया। इससे पूर्व आल इंडिया उलमा मशाइख बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद मोहम्मद अशरफ किछौछा शरीफ की ओर से फूलों की चादर हुजूर शाहजी मोहम्मद शेर मियां के दरबार में पेश की गई। इस मौके नायब सज्जादानशीन हजरत मौलाना वजाहत मियां शेरी, मुफ्ती नूर मोहम्मद हसनी, अरशद खान, मीनू बरकाती, शानू मियां खान शेरी, चांद खान शेरी, नसीम रजवी, नोमान मियां आदि मौजूद रहे।
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