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भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन से लें प्रेरणा

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श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन से प्रेरणा लेें
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खेकड़ा (बागपत)। कथा व्यास ने कहा भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के जीवन से प्रेरणा लेकर मित्रता के महत्व को समझना चाहिए। साथ ही राधा कृष्ण की झांकियों को देखकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।
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नगर के मोहल्ला औरंगाबाद चक्रसेनपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर मठ में बृहस्पतिवार को श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा व्यास अमरदीप अवस्थी ने भगवान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की कथा का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा भगवान श्रीकृष्ण के सुदामा बाल्यकाल के सखा थे। दोनों साथ खेले और बडे़ हुए। भगवान श्रीकृष्ण जब राधा संग महल में रहने लगे तो सुदामा गरीब होने के साथ उनसे बिछड़ गए। सुदामा ने जब अपनी पत्नी को कहा श्रीकृष्ण उनके बाल सखा हैं। वह अपने सखा से उनके महल में मिलने जाएंगे। तब सुदामा की पत्नी कहने लगी, अब श्रीकृष्ण उनसे नहीं मिलेंगे, न ही पहचान पाएंगे। पत्नी के मना करने के बाद भी सुदामा श्रीकृष्ण से मिलने उनके महल के बाहर पहुंचे। द्वारपालों ने सुदामा को भिखारी समझकर श्रीकृष्ण से मिलवाने से पहले मना किया। सुदामा की हट देखकर द्वारपालों ने सुदामा के द्वार पर आने की बात श्रीकृष्ण को बताई तो वह महल में दौड़ते हुए द्वार पर पहुंचे और बाल सखा सुदामा को गले से लगाकर महल के अंदर ले जाकर उनके पैर पानी से धोये। यह दृश्य देखकर राधा के अलावा सभी अचम्भित रह गए। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल सखा सुदामा को न भूलकर उनकी सेवा कर मित्रता की महत्ता को समझा। सभी को इससे प्रेरणा लेकर सच्ची मित्रता के पथ पर चलना चाहिए। साथ ही झांकियों का भी आयोजन किया। इसमें राधा कृष्ण बने बच्चों ने अपनी कलाकारी के माध्यम से भाव विभोर कर दिया। इस दौरान मंदिर कमेटी के प्रधान सुखपाल सभासद, विरेंद्र धामा, अनुज धामा, ओंकार शर्मा आदि मौजूद रहे।
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