पंचायत चुनाव के बाद जिले की सभी 721 ग्राम पंचायतों में प्रधानों का चयन हो गया है। लेकिन पंचायत सदस्यों की संख्या दो तिहाई से कम होने के कारण जिले के 78 गांव में अभी पंचायतों का गठन नहीं हो सकेगा जिससे प्रधानों को शपथग्रहण नहीं कराई जाएगी और न ही उन्हें कोई मिल सकेंगे।
जिले के सातों ब्लाकों की 721 ग्राम पंचायतों में प्रधानी के साथ-साथ ग्राम पंचायत सदस्य के 8881 पदों के लिए भी चुनाव कराया गया था। लेकिन अधिकांश गांव में प्रधानी का तो जोर रहा, ग्राम पंचायत सदस्य के चुनाव पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। परिणाम स्वरूप जिले में अधिकांश पद नामांकन न होने के कारण खाली रह गए। खाली रहे पदों से वह गांव सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे जिनमें निर्वाचित हुए सदस्यों की संख्या दो तिहाई से कम है। जिले में ऐसे करीब 78 गांव प्रकाश में आए हैं। इन 78 गांव में सबसे अधिक 21 गांव बरखेड़ा ब्लाक में हैं जबकि पूरनपुर की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ग्राम पंचायत सदस्यों की संख्या दो तिहाई से कम होने के कारण संबंधित गांव में पंचायतों व समितियों का गठन नहीं हो सकेगा। इससे चलते प्रधानों को न तो शपथ ग्रहण कराई जाएगी और ही उन्हें किसी प्रकार के अधिकार प्राप्त होंगे।
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कम से कम दो माह रहेगी दिक्कत
पंचायत चुनाव परिणाम आने के बाद रिक्त पदों पर उपचुनाव राज्य चुनाव आयोग के निर्देशों पर ही कराया जाएगा। लेकिन शासन की मंशा के अनुसार यदि पहले जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुखों के चुनाव हुए तो पंचायत सदस्य के उपचुनाव इसके बाद ही संभव हो सकेंगे। ऐसे में नवनिर्वाचित प्रधानों को कम से कम दो माह का इंतजार करना पड़ सकता है।
इन गांव में नहीं हो सकेगा
पंचायतों का गठन
ब्लाक गांव का नाम
मरौरी 12
बिलसंडा 09
अमरिया 06
ललौरीखेड़ा 08
बीसलपुर 06
बरखेड़ा 21
पूरनपुर 16 (स्थिति स्पष्ट नहीं )
कुल 78