बीसलपुर। तहसील के गांवों के 7463 बकायादारों पर सहकारिता विभाग की 10 करोड़ रुपये से अधिक की बकायेदारी है। बकायेदारों में दो हजार ताे परलोक सिधार चुके हैं। 300 बकायेदार विभाग को ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। मृतक बकायेदारों पर करीब दो करोड़ रुपये बकाया हैं। तमाम प्रयासों के बाद भी राजस्व वसूली में सफलता नहीं मिल रही है।
विभागीय के अभिलेखों के अनुसार तहसील के बीसलपुर ब्लॉक के बकायेदारों पर विभाग का करीब 2.50 करोड़, बरखेड़ा ब्लॉक में तीन करोड़ और बिलसंडा में करीब 4.85 करोड़ बकाया हैं। विभाग की सूची में दर्ज बकायेदारों में करीब 2000 मृतक हैं। इनके परिजन बकाया देना तो दूर परिवार के मृतकों पर बकाया होने की बात भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
बताते हैं कर्ज माफी की आस में बकायेदार धनराशि जमा करने से कतरा रहे हैं। वैसे तो सभी सहकारी समितियों का रुपया बाकी है, लेकिन सर्वाधिक बकाया परेवा किशनी, अमृता खास, चुर्रासकतपुर, रसायाखानपुर, खांडेपुर समितियों पर है। समिति कर्मचारी और संबंधित जिला सहकारी बैंकों के अधिकारी बकाया वसूल का काफी प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सफलता नहीं मिल रही। बकाया धनराशि की वसूली न होने से समितियां काफी घाटे में चल रही हैं। इस वजह से समितियों पर खाद बिक्री व विभागीय व्यवसाय भी न के बराबर हो रहा है।
-
यहां सबसे ज्यादा मृतक बकायेदार
सर्वाधिक मृतक बकायेदार रसायाखानपुर, गांव चुर्रासकतपुर, मीरपुर, बीसलपुर नगर, बिलसंडा नगर, बमरोली, करेली, दियोरिया, मधवापुर, पिपरिया मंडन, मुडिया हुलास, अमृता खास, रंपुरा और नवदिया स्थानों पर हैं। वहीं, 300 बकाएदार बिना धनरराशि जमा किए गांवों से दूसरे स्थानों पर चले गए हैं। विभाग को इनकी जानकारी भी नहीं मिल पा रही। इन पर करीब 20 लाख रुपये बकाया हैं। दूसरी जगह जाने वाले बकायेदार भंदेग कंजा, सिधौरा, खरगपुर, ज्योरह, कल्याणपुर, रामपुर, जगतपुर, कटैंया आदि गांवों के हैं।
-
वसूली में टीमें जुटीं, सफलता नहीं मिल रही
मृतक बकायेदारों के परिजन और गांवों से दूसरे स्थानों पर चले गए बकाएदाराें से वसूली में विभाग की टीमें जुटी हैं, लेकिन वसूली नहीं हो पा रही है। सहायक विकास अधिकारी सहकारिता लालसिंह ने बताया कि वसूली के लिए मृतक बकायेदारों के परिजनों को समितियों का सदस्य बनाया जा रहा है। सदस्य बनाने के बाद वसूली का प्रयास किया जाएगा। गांवों से दूसरे स्थानों पर चले गए बकायेदारों का भी पता लगाया जा रहा है। वसूली के लिए अभियान चलाया जा रहा है।