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पॉलिथीन: मजबूरी ही सही, बदलने लगी आदत
जिला प्रशासन की सख्ती का दिख रहा असर, कपड़े के थैलों की मांग बढ़ी
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगे एक सप्ताह से ज्यादा हो गया है, कई दुकानों पर इसका असर भी दिखाई दे रहा है। सब्जी और अन्य घरेलू सामानों की खरीदारी करने के हाथों में झोले दिख रहे हैं। कार्रवाई के डर से दुकानदार भी पॉलिथीन से बच रहे हैं और कपड़ों के थैलों में सामान की बिक्री करने में ही अपनी भलाई समझ रहे है।
प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने 15 जुलाई से 50 माइक्रोन से कम मात्रा की पतली पॉलिथीन पर पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके बाद से व्यापारियों की सिरदर्दी बढ़ गई है। लगातार चल रहे छापामारी अभियान के चलते व्यापारियों में जुर्माने का डर है। मंगलवार को शहर के छतरी चौराहे, गौहनिया चौराहे आदि जगहों पर सामान लेने पहुंचे ग्राहकों को व्यापारियों ने पॉलिथीन में सामान देने से इंकार कर दिया, इस बात से नाराज कुछ लोग दूसरी दुकान पर सामान की खरीद करने चले गए। यहां भी भी व्यापारियों ने पॉलिथीन पर बैन लगने की बात कहते हुए कपड़े के थैले में सामान देने की बात कही। बाजार में कुछ जगहों पर चोरी छिपके स्टॉक में रखी पॉलिथीन की बिक्री की जा रही है। व्यापारी जान पहचान वाले को पॉलिथीन देते वक्त सावधानी बरतने की सलाह दे रहे है। यही वजह है कि अधिकांश लोग घर से झोला और कपड़े के थैले लेकर खरीदारी करने पहुंच रहे है। प्रशासन भी पॉलिथीन की रोकथाम को लगातार छापामारी में लगी है। प्रशासन की सख्ती के कारण बड़े दुकानदारों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों ने भी दुकान पर कपड़े के थैले रखने शुरू कर दिए है। पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगने के बाद जहां कपड़े से बने थैलों की डिमांड बढ़ गई है, वहीं चाट-टिक्की, जूस, सब्जी, फल आदि का ठेला लगाने वाले कागज के पैकेट व कपड़ों के थैले महंगे होने के बाद भी उनमें सामान देने में ही अपनी भलाई समझ रहे है।