शाहजहांपुर का 1700 हेक्टेयर जंगल पीलीभीत टाइगर रिजर्व में होगा शमिल
क्रासर....
लंबे समय बाद शासन से मिली मंजूरी, जंगल के साथ वनकर्मी भी हो जाएंगे स्थानांतरित
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र का दायरा बढ़ने वाला है। शाहजहांपुर जिले के खुटार रेंज अंतर्गत आने वाले 1700 हेक्टेयर वन क्षेत्र को पीटीआर में शामिल किए जाने की शासन से मंजूरी मिल गई है। जल्द ही खुटार का यह हस्तांतरित वन क्षेत्र पीलीभीत टाइगर रिजर्व का हिस्सा हो जाएगा। यही नहीं संबंधित वन क्षेत्र में कार्य करने वाले वनकर्मी भी टाइगर रिजर्व के कर्मचारी हो जाएंगे। शासन से मंजूरी के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व प्रशासन ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। जल्द ही दोनों जिलों के वन अधिकारियों की बैठक भी इसको लेकर आयोजित की जाएगी।
कई साल पहले शासन ने शाहजहांपुर जिले के 94 गावं को तो जिले में शामिल कर दिया था, लेकिन कुछ व्यवस्थाएं आज भी शाहजहांपुर जिले के आधीन चल रही हैं। उसमें खुटार वन क्षेत्र का 17 सौ हेक्टेयर जंगल भी शामिल था। टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस मामले में शासन स्तर पर पत्राचार शुरू किए गए थे। लंबे इंतेजार के बाद शासन से मंजूरी मिल गई है। 17 सौ हेक्टेयर जंगल क्षेत्र के साथ वहां तैनात वनकर्मी भी अब पीटीआर के आधीन हो जाएंगे। जिला व शाहजहांपुर की सीमा से सटे इलाके में बसे 94 गांव को वर्ष 2001 में शासन ने पीलीभीत जनपद में शामिल कर दिया था। इसके बाद उन गांवों में रहने वालों को जनपद की नागरिकता प्राप्त हो गई थी। इसके बावजूद सीमा में पडने वाले जंगल, मंडी सहित कुछ विभाग शाहजहांपुर के ही आधीन रहे थे। इसके चलते इस मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप भी शुरू हो गया था, लेकिन मामला ठंडा पड़ा रहा।
इधर पीटीआर घोषित होने के बाद इस मामले की दोबारा शुरूआत की गई। क्योंकि जंगल के अधिक दायरे का मामला था लिहाजा पीटीआर प्रशासन ने इस मामले में शासन स्तर पर पत्राचार करने शुरू किए। लंबे समय के बाद शासन स्तर से इस मामले में मंजूरी दे दी है। जिसके तहत शाहजहांपुर के खुटार वन रेंज के जंगल का 17 सौ हेक्टेयर का दायरा पीटीआर के आधीन हो जाएगा। टाइगर रिजर्व के एफडी एच राजा मोहन ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शासन स्तर से इस मामले में मंजूरी मिल गई है। कागजी कार्रवाई पूरी कर शाहजहांपुर वन प्रभाग को पत्र भेजा जाएगा। जिसके बाद संयुक्त रूप से बैठक कर 17 सौ हेक्टेयर जंगल क्षेत्र को हस्तांतरित किया जाएगा। इसी के साथ संबंधित वन क्षेत्र में कार्य करने वाले वन कर्मचारी भी पीटीआर में आ जाएंगे।