एक किसान का वर्जन आना है
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सेटिंग से हो रही गेहूं खरीद, किसान परेशान
मंडी में दो से तीन दिन तक करना पड़ रहा इंतजार
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
गेहूं खरीद के लिए प्रशासन की ओर से जिले भर में 146 क्रय केंद्र खोले गए हैं, लेकिन इन क्रय केंद्रों पर खरीद के नाम पर किसानों का शोषण हो रहा है। क्रय केंद्रों पर सेटिंग करने अथवा खर्च के नाम पर 60 से 100 रुपये तक देने को राजी होने पर ही किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है। इसको लेकर कई क्रय केंद्रों पर ट्रॉलियां खड़ी हैं।
गेहूं खरीद में पारदर्शिता लाने के लिए जहां सरकार तमाम प्रयास कर रही है वहीं मंडी की ओर से भी क्रय केंद्रों सीसीटीवी कैमरे आदि लगाए गए हैं। इसके बाद भी क्रय केंद्रों पर व्याप्त भ्रष्टाचार नहीं रुक पा रहा है। यदि आपकी पहुंच नहीं है तो बिना खर्चा दिया गेहूं तौलाना मुश्किल ही नहीं असंभव है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने मंडी में लगे गेहूं क्रय केंद्रों का निरीक्षण किया। इसमें विपणन विभाग, नकाफ सहित कुछ क्रय केंद्र पर तौल होती मिली जबकि आवश्यक वस्तु निगम, एग्रो सहित कई केंद्र पर तौल बंद थी जबकि लगभग सभी क्रय केंद्रों पर गेहूं की ट्रॉलियां खड़ी थीं। आवश्यक वस्तु निगम के क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर पहुंचे किसानों का कहना था कि 100 रुपये प्रति क्विंटल मांगे जा रहे हैं। न देने पर लेबर न होने का बहाना बताया जा रहा है। वहीं, नकाफ क्रय केंद्र पर तौल करा रहे किसान ने बताया कि 70 रुपये कटौती करानी पड़ी है।
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सेटिंग में लगे रहते हैं ठेकेदार/प्रतिनिधि
गेहूूं क्रय केंद्रों पर यूं तो केंद्र प्रभारी की नियुक्ति रहती है लेकिन किसका गेहूं खरीदना है, किसने कितना खर्चा लेना है। गेहूं में नमी कितनी काटनी है यह सब हैंडलिंग ठेकेदार अथवा उनके प्रतिनिधि ही निर्धारित करते हैं। क्रय केंद्र पर गेहूं पहुंचने के बाद ठेकेदार/प्रतिनिधि किसान से सौदा तय करने के बाद ही तौल शुरू कराने की अनुमति देते हैं।
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ऐसे भी कटती है किसान की जेब
क्रय केंद्र पर गेहूं लेकर आने वाले किसान को अपने गेहूं का ढेर लगाना होता है लेकिन यदि कोई किसान ढेर के नीचे तिरपाल या पन्नी बिछाना चाहे तो उसे ऐसा नहीं करने दिया जाता। इसके पीछे दानों का खेल है। तौल के बाद जमीन पर छूटे गेहूं (दाने) मजदूर इनाम के रूप में ले लेते हैं लेकिन अब यह कटौती का नया धंधा बन गया है। तौलाई के समय जानबूझ कर काफी गेहूं नीचे छोड़ दिया जाता है साथ ही कट्टा भरने के बाद जब लेबर उसे खींचकर ले जाती है तो काफी गेहूं इस घिसटन के सारे एकत्र हो जाता है। 50 क्विंटल गेहूं तौलने पर एक से डेढ़ क्विंटल तक गेहूं जमीन पर छोड़ा जा रहा है।
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खर्चा न देने पर नहीं हो रही तौल
रविवार को ट्राली में गेहूं लेकर आवश्यक वस्तु निगम के क्रय केंद्र पर आए हैं। सोमवार सुबह से गेहूं तौलाने का प्रयास कर रहे हैं। 100 रुपया प्रति क्विंटल खर्चा मांगा गया, खर्चा न देने पर लेबर न होने का बहाना पढ़ाया जा रहा है।
निर्मल सिंह, मथना जप्ती
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दो दिन से नहीं हो रही तौल
मंडी में गेहूं लेकर दो दिन से पड़े हैं। ट्रॉली खाली कराकर भेज दी है अब ढेर रखा रहे हैं। कोई भुगतान न होने की बात कह रहा तो कोई लेबर न होने की। सारा खेल सेटिंग का है।
कुलदीप सिंह, अभयपुर माधोपुर
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कोई सुनने वाला नहीं
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सुबह से गेहूं लेकर मंडी में आए हैं। खराब मौसम को देखते हुए टिनशेड में गेहूं उतार दिया। अब कोई सुनने वाला नहीं है। टिनशेड के सामने किसी सहकारी संस्था का केंद्र हैं लेकिन प्रभारी न होने के चलते बात नहीं हो पा रही।
पूरनलाल, इग्घरा
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क्रय केंद्रों पर हावी है नेतागिरी
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क्रय केंद्रों पर हैंडलिंग के ठेके सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के ही रहते हैं। इस बार कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी लेकिन हर क्रय केंद्र पर सत्ता पक्ष की नेतागिरी हावी है। सब को चाहिए किसान कहां से और किसे किसे दे।
राजदीप सिंह, गजरौला
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सिक्के का एक पहलू यह भी है
क्रय केंद्रों पर जहां खर्च के नाम पर कटौती से किसान परेशान हैं वहीं इसके संचालक मुनाफा कमाने के बाद भी दुखी हैं। सिस्टम की कमियों का खामियाजा सभी भुगत रहे हैं। क्रय केंद्र संचालन में गोदाम से वारदाना उठाने से लेकर एफसीआई गोदाम में तक उतार तक ऐसे तमाम खर्च हैं जो सरकार से नहीं मिलते और यदि मिलते भी हैं तो वर्तमान दर के हिसाब से काफी कम हैं। मसलन क्रय केंद्र से गोदाम तक का भाड़ा, सूख, उतराई। कई जगह भेंट पूजा भी करनी पड़ती है। इन सबके चलते गेहूं खरीद में भ्रष्टाचार दूर नहीं हो पा रहा है।
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रविवार और सोमवार को सार्वजनिक अवकाश था लेकिन गेहूं की आवक को देखते हुए सोमवार को तौल कराई गई है। मजदूरों की कमी एवं आवक अधिक होने के चलते हो सकता है कुछ किसानों की तौल न हो सकी है। खर्चा मांगने की शिकायत किसी ने नहीं की है। यदि शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अविनाश कुमार झा, डिप्टी आरएमओ