17पीबीटीपी-1 से 8 तक
दिव्यांगों व बुजुर्गों के लिए आसान नहीं रेल का सफर
आखिर कब टूटेगी रेल प्रशासन की कुंभकर्णी नींद
यात्री बोले केंद्रीय मंत्री का संसदीय क्षेत्र, फिर भी झेलनी पड़ रही है असुविधा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी का संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी रेलवे स्टेशन पर दिव्यांगों व बुजुर्गों को असुविधा झेलनी पड़ रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर रेलवे स्टेशन पर ब्राडगेज प्लेटफार्म से मीटरगेज प्लेटफार्म पर जाने के लिए फुट ओवरब्रिज का निर्माण तो करा दिया पर लंबे समय बाद भी रेल प्रशासन ने दिव्यांगों व बुजुर्गों को होने वाली असुविधा के बारे में नहीं सोचा। पाथ वे (फुटपाथ) का निर्माण नहीं होने की वजह से उन्हें फुट ओवरब्रिज पर चढ़कर ही प्लेटफार्म पार करना पड़ता है। कई बार दिव्यांग व बुजुर्ग चोटिल हो चुकें हैं पर रेल प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है।
वर्ष 2008 में ब्राडगेज कंवर्जन का कार्य शुरू होने के बाद कुछ दिन पहले प्लेटफार्म नंबर एक को मीटरगेज से ब्राडगेज प्लेटफार्म में तब्दील कर नए फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया। इन सब के बीच रेल प्रशासन अपने ही यात्रियों की सुविधा देना भूल गया। जिसका खामियाजा रेल यात्रियों को रोजाना भुगतना पड़ रहा है। खातसौर से दिव्यांग और बुजुर्ग जब भी स्टेशन पर पहुंचते ही तो रेल प्रशासन को कोसते नतर आते है।
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प्लेटफार्म पार करना है तो रुकना तो पड़ेेगा ही
एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म तक जाने के लिए फुट ओवरब्रिज की कम से कम 160 सीढ़ियां पार करना पड़तीं हैं। ऐसे में बच्चे, बुजुर्ग, महिला, युवा हर किसी को ओवरब्रिज पर थक हारकर रुकना ही पड़ता है। सीढ़ी पार करते समय सांस उखड़ने सी लगती है। लिहाजा यात्री रुककर आराम करने में ही अपनी भलाई समझते है।
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यात्री बोलें...
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यात्री मैकूलाल कश्यप ने यात्रियों को हो रही असुविधा को रेल प्रशासन की लापरवाही बताया कहा कि फुट ओवरब्रिज का निर्माण भी गलत तरीके से हुआ है। जीने में स्पेस ज्यादा होने की वजह से उतरने व चढ़ने में पसीना छूट जाता है। पाथ वे (फुटपाथ) की व्यवस्था होनी चाहिए।
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यात्री महेंद्रपाल सिंह ने केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी पर तंज कसा कहा कि संसदीय क्षेत्र होने के बाद भी दिव्यांगों व बुजुर्गों को असुविधा हो रही है। हम तो किसी तरह सीढ़ियां पार कर लेते है पर बुजुर्गों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है
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बुजुर्ग यात्री सरोजनी देवी को पुवायां जाना था, प्लेटफार्म की सीढ़ियां पार करते हुए उनके माथे से पसीना टपक रहा था। पूछने पर भावुक होते हुए बोली कम से कम बुजुर्गों का तो रेल प्रशासन को ख्याल रख लेता। पाथ वे (फुटपाथ) बनने से कम समस्या होती।
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यात्री उमेश शुक्ला ने दिव्यांगों व बुजुर्गों को हो रही असुविधा के लिए रेल प्रशासन की लापरवाही बताई। कहा कि कई बार फुट ओवरब्रिज पर चढ़ते व उतरे वक्त बुजुर्ग फिसलकर चोटिल हो चुके हैं। मगर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया।
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बुजुर्ग बलराम ने रेल प्रशासन के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को सीधे तौर पर इस लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया। कहा वह दिव्यांगों व बुजुर्गों को प्राथमिकता देने की बात करती है लेकिन उनको हो रही असुविधा के बारे में मेनका गांधी ने कभी नहीं सोचा। आज तक रेंप की व्यवस्था नहीं हो सकी है।