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प्रदेश के गन्ना किसानों को ब्याज के 2750 करोड़ का करें भुगतान: हाईकोर्ट

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पीलीभीत। उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने करीब 23 माह बाद भी आदेश का अनुपालन न होने पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त से कड़ी नाराजगी जताते हुए गन्ना किसानों के पिछले तीन सत्रों के बकाया गन्ना भुगतान पर ब्याज के 2750 करोड़ रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही पांच अप्रैल को कोर्ट हलफनामा दाखिल करने को कहा गया। यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने किसान मजदूर संगठन के संयोजक और पूर्व विधायक वीएम सिंह द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।
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किसान नेता वीएम सिंह वर्ष 2017 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार जब अपने बकाया पर ब्याज की वसूली करती है तो फिर गन्ना किसानों को उनकी चीनी मिलों पर वर्षों रहने वाले बकाया भुगतान पर क्यों नहीं बैंक की दर से ब्याज मिलना चाहिए। इस याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने नौ मार्च 2017 को राज्य सरकार को आदेश दिया था कि किसानों को मय ब्याज के गन्ने का बकाया भुगतान किया जाए। इसके लिए चार माह का समय निर्धारित किया गया था।
इधर वीएम सिंह ने गत वर्ष 19 अप्रैल को प्रदेश के गन्ना आयुक्त संजय आर भूस रेड्डी के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की। दायर याचिका में बताया कि हाईकार्ट द्वारा पूर्व में किए गए आदेश का अब तक अनुपालन नहीं किया गया है। प्रदेश के गन्ना किसानों को उनके बकाया गन्ना भुगतान पर बनने वाले 2750 करोड़ रुपये के ब्याज की अदायगी नहीं की गई है। प्रदेश के गन्ना आयुक्त ने हाईकोर्ट की जान-बूझकर अवमानना की है, लिहाजा किसानों को चीनी मिलों से ब्याज की रकम का भुगतान कराया जाए। इधर इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रदेश के गन्ना आयुक्त से कड़ी नाराजगी जताते हुए आदेश दिया कि हाईकोर्ट के नौ मार्च 2017 के आदेश का अनुपालन करके गन्ना आयुक्त पांच अप्रैल को अदालत में हलफनामा दाखिल करें। इधर हाईकोर्ट के सख्त रुख से चीनी मिल मालिकों में हड़कंप मच गया है, वहीं किसानों को बकाया पर ब्याज की रकम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
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