हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चालीसवें पर जिले भर में चेहलुम का आयोजन हुआ। ताजियों का जुलूस निकालकर कर्बला पहुंचाया गया। वहीं अकीदतमंदों ने घरों में उनके चालीसवें की फातिहा कराई।
मैदान ए कर्बला में शहीद हुए हजरत इमाम हुसैन व उनके अनुयायियों की शहादत के चालीस दिन बाद चेहलुम मनाया जाता है। शहर में शुक्रवार को विभिन्न इलाकों के इमामबाड़ों से ताजिए निकाले गए। शहर के वेलों वाले चौराहे पर विभिन्न क्षेत्रों से आए ताजियों का जुलूस शुरू हुआ। यह जुलूस कमल्ले चौराहा, चौक बाजार, जेपी रोड, बरेली गेट, लकड़ी मंडी होता हुआ कर्बला पहुंचा। यहां अदब ओ एहतराम से ताजिए दफन किए गए। हजरत इमाम हुसैन की फातिहा दिलाई। इधर घरों में भी इमाम हुसैन के चालीसवें पर फातिहाख्वानी दिलाई गई।
परेवा वैश्य कस्बे के पांचों इमामबाड़ों से ताजिये निकाले गए। जो कस्बे के निर्धारित मार्गों से होते हुए बुर्ज वाले ठेरे पर पहुंचे। यहां आसपास गांवों से आए ताजिए भी शामिल हुए। इस मौके पर बाजार मोहल्ले का ताजिया पहले स्थान पर, जबकि गड़ी मोहल्ले का ताजिया दूसरे स्थान पर रहा। मेला कमेटी के आयोजकों ने कारीगरों को सम्मानित भी किया। मोहल्ला गढ़ी में मेला भी लगा। शाम करीब चार बजे ताजियों को कर्बला ले जाकर दफन किया गया। जुलूस के दौरान एसओ केपी सिंह, चौकी इंचार्ज घनश्याम बहादुर समेत पीएसी व भारी फोर्स मौजूद रहा।
अमरिया क्षेत्र के मुस्लिम बाहुल्य गांवों में शुक्रवार को ताजियों का जलूस निकाला गया। वहीं बृहस्पतिवार रात कस्बा समेत अन्य क्षेत्र में ताजियों का जलूस निकाला गया, जो रात भर जारी रहा। शुक्रवार को दोपहर के बाद कर्बला घेरा शरीफ में तुमड़िया, चठिया न्याज अहमद, सरैनी तिरकुनिया, धुंदरी, ढेरम, सुकटिया, अमरिया, कैंचू टांडा आदि गांवों से ताजिये एकत्र हुए और ताजियों को गमगीन माहौल में दफन किया गया।