माधोटांडा (पीलीभीत)। तराई क्षेत्र के रमनगरा बुझिया में भूकटान से बचाव को बनाए गए कटर शारदा नदी में धंसते जा रहे हैं। ऐसे मेें यदि शारदा का जलस्तर बढ़ता है तो स्थिति बिगड़ सकती है।
क्षेत्र के रमनगरा बुझिया में गत वर्ष शारदा नदी ने कहर बरपाते हुए कई एकड़ कृषि भूमि व आबादी क्षेत्र को निगल लिया था। उस दौरान बरसात बाद बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पूरा वर्ष बीतने के बाद भी यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य नहीं करा गए। इधर अब जब शारदा नदी के जलस्तर में बढ़ोत्तरी होने लगी तो बाढ़ ने रमनगरा बुझिया में भूकटान रोकने को रेत भरे बोरों से 36 कटरों का निर्माण कराया। माना जा रहा था कि इससे भूकटान रुकेगा। इधर शारदा नदी का जलस्तर रोजाना ही घटता बढ़ता रहता है। हालांकि अभी शारदा के पानी की धार तो किनारे पर नहीं आई है, इसके बावजूद डाउन स्ट्रीम में बनाए गये कटर पानी में धंसने लगे हैं। इस इलाके में शारदा ने गत वर्ष बाढ़ के दौरान गोलाई में लूप बनाकर कटान किया था। हालांकि इस वर्ष अभी बाढ़ तो नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा हैं कि बाढ़ आने पर बनाए गए कटर पानी में बह सकते हैं। जिससे यहां स्थिति संभलने के बजाए और भी बिगड़ सकती है। इधर किसानों को इस बार यह उम्मीद है कि शायद अब बाढ़ न आए, इसलिए नदी के मोहाने पर किसानों ने जो सब्जी फसलें व गन्ना बो रखा हैं, उसमें खाद पानी लगा रहे हैं। इधर जलस्तर में गिरावट के बावजूद रमनगरा में छह नंबर स्पर के डाउन स्ट्रीम में बनाया गए स्पर की नोज (स्पर का अगला भाग) का हिस्सा जिसमें जियो बेग लगाए गए थे, वह शारदा नदी की भेंट चढ़ गया। यहां कराए गए बाढ़ नियंत्रण कार्यों की स्थिति देखकर लगता है कि यदि शारदा अपने पुराने ढर्रे पर चली तो यहां स्थिति गत वर्ष की भांति भयावह हो सकती है।