उपाधि महाविद्यालय में स्थापना के 52 साल बाद भी यूजीसी से नैक निरीक्षण नहीं हो सका है। नवीन शैक्षिक सत्र में महाविद्यालय प्रशासन नैक निरीक्षण कराने के लिए कमर कस चुका है। इसके लिए बाकायदा एक कमेटी भी गठित कर दी गई है।
शहर में उपाधि महाविद्यालय की स्थापना 1964 में हुई थी। स्थापना के 52 साल में महाविद्यालय के विकास पर कभी किसी ने ध्यान ही नहीं दिया। कई बार मैनेजमेंट कमेटी अस्तित्व में आई, लेकिन वह भी महाविद्यालय का भला करने में सफल नहीं हो सकी। लंबे अरसे तक प्राचार्यों की तैनाती भी आयोग से न होकर स्थानीय स्तर पर होती रही। इसकी वजह से महाविद्यालय प्रशासन कभी सशक्त नहीं हो सका। निर्णय लेने की क्षमता के अभाव में नैक के निरीक्षण पर ध्यान ही नहीं दिया गया। नैक निरीक्षण न होने के चलते यूजीसी से कॉलेज को कोई ग्रांट नहीं मिल सकी। अब मौजूदा प्राचार्य डॉ. प्रमोद सिंह ने नवीन शैक्षिक सत्र में यूजीसी से नैक निरीक्षण कराने के लिए कमर कस ली है। इसके लिए प्राचार्य के निर्देशन में कमेटी का भी गठन किया जा चुका है। इसमें डॉ. आरएस मिश्र अध्यक्ष और डॉ. विपिन नीरज, राजेश कुमार, लेखाकार अनिल गोयल को सदस्य बनाया गया है।
बदहाली के दौर से गुजर रहा कॉलेज
महाविद्यालय में अनियमितताओं की शिकायत के बाद शासन ने वर्ष 2004 में यहां कंट्रोलर नियुक्त कर दिया था। तबसे लेकर आज तक यहां कंट्रोलर के इशारे पर ही काम होते आ रहे हैं। महाविद्यालय में प्रवक्ताओं की खासी कमी है। इसके चलते यहां साल भर विद्यार्थियों की संख्या न के बराबर ही रहती है। महाविद्यालय भवन को भी मरम्मत की जरूरत है। यदि महाविद्यालय प्रशासन नैक निरीक्षण की तैयारी करता है तो उसे यहां कई बड़े कार्य करने होंगे।
यह हैं नैक निरीक्षण के मानक
- पर्याप्त भवन
- पर्याप्त स्टाफ
- लाइब्रेरी
- छात्र उपस्थिति
- महाविद्यालय परिसर का सुंदरीकरण
- अन्य हाईटेक सुविधाएं
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महाविद्यालय के नैक निरीक्षण को लेकर तैयारी की जा रही है। कमेटी भी बना दी गई है। महाविद्यालय स्तर पर सत्र शुरू होते ही तैयारियां तेज कर दी जाएंगी।
- डॉ. प्रमोद सिंह, प्राचार्य उपाधि महाविद्यालय