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प्रतिबंध लगाकर भूले अफसर, फिर चलन में आई पाॅलिथीन

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पीलीभीत। प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई से दो अक्तूबर के बीच तीन चरणों मेें पॉलिथीन, थर्मोकोल से बने उत्पाद और प्लास्टिक के कैरी बैग के खिलाफ अभियान चलाते हुए इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया। जिले में शुरूआती दौर में जिला और नगर पालिका परिषद प्रशासन ने अभियान चलाकर लोगों को पॉलिथीन और थर्मोकोल के बैग, कप-प्लेट, ग्लास आदि का इस्तेमाल न करने को जागरूक किया। दुकानों पर छापा मारकर पॉलिथीन जब्त भी की गई। इधर, जैसे-जैसे समय बीतता गया अभियान भी ठंडा होता गया। नतीजा यह हुआ कि शहर से लेकर गांव देहात तक पॉलिथीन, थर्मोेकोल के कप-प्लेट, ग्लास और प्लास्टिक कैरी बैग का इस्तेमाल एक बार फिर तेजी से शुरू हो गया है।
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नौ मीट्रिक टन कूड़े में आज भी 10 फीसदी पॉलिथीन
ढाई लाख की आबादी वाले शहर की बात करें तो यहां के 27 वार्डों से रोजाना करीब नौ मीट्रिक टन कूड़ा कचरा निकलता है। एक अनुमान के मुताबिक प्रतिबंध से पूर्व नौ मीट्रिक टन कूड़े में करीब 10 फीसदी पॉलिथीन निकलती थी और अब प्रतिबंध के बाद भी 10 फीसदी पॉलिथीन निकल रही है। इससे साफ है कि हालात जस के तस हैं। शहर में बड़े पैमाने पर पॉलिथीन पैक्ड आइटमों की बिक्री आज भी हो रही है और कचरे के रूप में घरों से नालों, नालियों में पॉलिथीन पहुंच रही है। शहर के अस्थायी कूड़ाघरों में पड़े कूड़े में पॉलिथीन, थर्मोकोल के कप-प्लेट, गिलास और प्लास्टिक के कैरी बैगों के ढेर आसानी से देखे जा सकते हैं। वहीं शहर के सड़कों पर लगे फलों के ठेलों व चाय आदि की दुकानों पर सर्वाधिक हानिकारक काली पॉलिथीन का इस्तेमाल खुलेआम हो रहा है।
पहले दिखाई सख्ती, अब दरियादिली
सरकार भले ही कितने भी कानून बना ले, लेकिन जब तक उन्हें अमली जामा पहनाने वाली सरकारी मशीनरी काम नहीं करेगी, बेहतर नतीजे आना मुश्किल हैं। कुछ ऐसा ही हाल पॉलिथीन, थर्मोकोल और प्लास्टिक कैरी बैग के उपयोग को लेकर है। सरकार ने इन सब पर प्रतिबंध तो लगा दिया है, लेकिन जिला और स्थानीय निकाय प्रशासन पाबंदी लगाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। जिले में इसके कारोबार पर गौर करें तो शहर समेत पूरनपुर, बीसलपुर आदि में प्रतिबंध से पूर्व रोजाना करीब एक लाख रुपये की पॉलिथीन बिक्री हो रही थी। बताते हैं कि अब पुन: यह कारोबार तेजी पकड़ चुका है। सरकारी अमले की कार्रवाई देखें तो शुरूआती दौर में चलाए गए अभियान में कुल 42 किलो पॉलिथीन जब्त कर 42 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया था। इसके बाद 20 दिसंबर को एसडीएम सदर की अगुवाई में शहर में अभियान चलाया गया। इसमें भी 40 किलो पॉलिथीन जब्त कर व्यापारियों से जुर्माना वसूला गया। व्यापारियों के विरोध करने पर ये अभियान मात्र एक ही दिन चल सका। तबसे लेकर आज तक कोई अभियान नहीं चलाया गया।
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जिला प्रशासन के सहयोग से शहर को पॉलिथीन मुक्त करने की दिशा में तेजी से प्रयास चल रहे हैं। बड़ी मात्रा में पॉलीथिन जब्त कर जुर्माना वसूला जा चुका है, लेकिन इसे पूर्णत: बंद करने के लिए आम लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। - सोमप्रकाश, प्रभारी ईओ, नगर पालिका परिषद
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