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महिला प्रधान बोलीं-जब सम्मानित नहीं करना था तो बुलाया क्यो?

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‘जब सम्मानित नहीं करना था तो बुलाया क्यों’
सम्मान के लिए लखनऊ ले गए अफसर ग्राम प्रधानों संग बैरंग लौटे
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शासन ने जिले की 33 महिला प्रधानों व 32 स्वच्छाग्रही को लखनऊ बुलाकर नजर अंदाज कर दिया गया। कार्यक्रम में शामिल होकर शुक्रवार सुबह जनपद लौटी महिला प्रधानों व स्वच्छाग्रही के चेहरे पर मायूस थी। सभी की जुबान पर एक ही सवाल था कि जब सम्मानित नहीं करना था तो बुलाया क्यों? कुछ महिला प्रधान व स्वच्छाग्रही की मानें तो लखनऊ पहुंचने के बाद पता चला कि मुख्यमंत्री ने सिर्फ ओडीएफ घोषित जिले की महिला प्रधान व स्वच्छाग्रही को सम्मानित करने के लिए बुलाया था।
दरअसल, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत महिला प्रधानों ने गांवों को ओडीएफ यानी खुले से शौच मुक्त बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत की थी उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित करने के महिला दिवस के अवसर पर लखनऊ बुलाया। पंचायत विभाग की अगुवाई में गुरुवार को सभी महिला प्रधान व स्वच्छाग्रही लखनऊ पहुंची तो वहां के कुछ अधिकारियों ने ओडीएफ घोषित गांव के प्रधानों को ही सम्मानित किए जाने की बात कहकर उनको नजरअंदाज कर दिया। बिना सम्मानित लौटी प्रधानों के चेहरों पर शुक्रवार को मायूसी थी तो वहीं फजीहत झेलने के पंचायत विभाग के अधिकारी भी इस मामले में कुछ नहीं बोल रहे हैं। पंचायत विभाग के अधिकारियों की मानें तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शासन ने स्वच्छता अभियान के तहत बेहतर काम करने वाली महिला ग्राम प्रधानों व स्वच्छाग्रहियों की सूची मांगी गई थी। चयनित सूची के आधार पर बुधवार को पंचायत राज विभाग ने 33 महिला प्रधानों व 32 स्वच्छाग्रहियों को कार्यक्रम में शामिल कराने के लिए बस का इंतजाम करने उन्हें लखनऊ भेजा। लेकिन वह से उन्हें सम्मानित किए बगैर ही लौटना पड़ा।
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अधिकारी समझ ही नहीं पाएं यह हुआ क्या
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की टीम में शामिल डीपीसी नेहा सिंह भी कार्यक्रम में शामिल होने लखनऊ गई थी। शुक्रवार भोर में वह प्रधानों के साथ लौटी। कार्यालय में पहुंचने पर प्रधानों को सम्मानित नहीं किए जाने की बात पर वह भी टालमटोल कर गई। डीपीसी हेमेंद्र ने बताया कि जिला स्तर से बेहतर काम करने वाली महिला प्रधानों को डीएम सम्मानित करेंगी। जनपद की महिला प्रधानों को क्यों सम्मानित नहीं किया गया डीपीआरओ प्रमोद कुमार यादव भी इसका जवाब नहीं दे सके। सीडीओ डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने प्रधानों को सम्मानित नहीं किए जाने की बात से किनारा कर लिया कहा पंचायत राज विभाग का मामला है इसलिए मुझे कोई जानकारी नहीं।
ग्राम प्रधान बोलीं
-बिलसंडा ब्लॉक की ग्राम प्रधान कमला देवी ने बताया कि वह लखनऊ तो पहुंच गई लेकिन जाने का कोई नतीजा नहीं निकला। सिर्फ परेशानी झेलनी पड़ी। स्वचछ भारत मिशन अभियान को लेकर जीतोड़ मेहनत की थी।
-अमरिया ब्लॉक की ग्राम प्रधान शमीम बानों ने बताया कि लखनऊ बुलाया और सम्मान भी नहीं दिया। शमीम बानो की मानें तो जब कार्यक्रम में जनपद की किसी भी महिला प्रधान को सम्मानित नहीं करना था तो सभी को परेशान करने की जरूरत क्या थी।
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स्वच्छाग्रही बोलीं
-बरखेड़ा ब्लॉक की स्वच्छाग्रही गुड्डी शुक्रवार सुबह लखनऊ से लौटी उनके चेहरे पर मायूसी थी। पूछने पर बताया कि लखनऊ पहुंचकर तो हमें बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया गया। किसी ने सुध तक नहीं ली। जैसे गई वैसे ही वापस लौटना पड़ा।
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-पूरनपुर ब्लॉक की उर्मिला ने बताया कि अधिकारियों के साथ बड़ी उम्मीद के साथ लखनऊ गए थे कि कार्यक्रम में शामिल होकर सम्मानित होने का मौका मिलेगा। लेकिन बिना सम्मानित हुए ही बैरंग लोटना पड़ा। कार्यक्रम में जाने नतीजा शून्य रहा। सिर्फ परेशानी झेलनी पड़ी।
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