पीलीभीत। किसी भी उपासना की शुरुआत संकल्प के साथ होती है। मान्यता है कि संकल्पित पूजा ही ईश्वर तक पहुंचती है। नौ दिन की नवरात्र पूजा भी श्रद्धालु अपने-अपने संकल्प के साथ शुरू कर चुके हैं। नवरात्र को लेकर युवाओं में बेहद उत्साह देखा जा रहा है। युवाओं ने किस संकल्प के साथ पूजा की शुरुआत की, इसको लेकर युवाओं से रायशुमारी की तो उन्होंने अपना नजरिया साझा किया।
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शक्ति अर्जित करने की कामना
24 पीबीटीपी 8
नवरात्र शक्ति की उपासना का पर्व है। चाहे व्यक्ति किसी भी दिशा में कार्यरत हो, उसे इसकी जरूरत होती है। अब शक्ति चाहे शारीरिक हो या मानसिक। मेरी कोशिश होती है कि इन नौ दिनों में मैं मां के आशीर्वाद से इतनी शक्ति पा लूं और उसे संचित कर लूं कि पूरे साल उसका उपयोग किया जा सके।
-रविशंकर
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अहंकार रहित शक्ति पाना बेमिसाल
24 पीबीटीपी 9
शक्ति तो महिषासुर ने भी हासिल की थी, लेकिन वह मां की शक्ति से पराजित हुआ। यह एक गहरा संदेश है शक्ति के उपयोग और दुरुपयोग का। शक्ति हासिल करने से ज्यादा कठिन है उसे संभाल पाना। जैसे ही शक्ति का अहसास होता है, अहंकार का अहसास खुद व खुद होने लगता है। अहंकार रहित शक्ति पाना बेमिसाल है।
-अमित पाराशर
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सभी की सोच सकारात्मक हो
24 पीबीटीपी 10
नवरात्र पर नौ दिन सभी श्रद्धालु शक्ति की देवी मां दुर्गा का आशीर्वाद हासिल करने की कोशिश में रहते हैं। यह साधना सिर्फ यही तक सीमित नहीं रहती। शायद इसीलिए व्रत का विधान है ताकि मन पवित्र रहे और सोच सच्ची हो। इन नवरात्र मेरा यही संकल्प है। ऐसा प्रयास सभी को करना चाहिए।
निहारिका राठौर
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सभी के विचारों में आए शुद्धता
24 पीबीटीपी 11
संकीर्ण मानसिकता किसी के लिए भी सुखदायी नहीं होती। नवरात्र वह अवसर है जब इस मानसिकता से खुद को अलग किए जाए। ऐसा करने पर ही हम खुद का भला कर सकेंगे और दूसरे के भले की भी सोच सकेंगे। नवरात्र में मां से मेरी यही प्रार्थना है कि सभी के विचार में शुद्धता आए।
प्रेरणा मिश्रा