जंगल की फेंसिंग के साथ सतर्कता ही रोकेगी नरभक्षी हमले
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत।
वनकटी क्षेत्र में बाघ के हमलों में हुई कई मौतों के बाद भी ग्रामीण जंगल न जाने के अलर्ट को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यह इलाका टाइगर रिजर्व से सटा हुआ है। वनकटी में अब तक हुई ज्यादातर घटनाएं जंगल के अंदर या समीप हुईं हैं। हर घटना के बाद ग्रामीणों को जंगल जाने को लेकर सतर्क किया जाता रहा। पर लोग अब भी जीविका या लकड़ी लाने के नाम पर जंगल जा रहे हैं। साथ ही घटनाओं के बाद जंगल की बाउंड्री पर फेंसिंग कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग उठने लगी हैं।
पहली जुलाई को ही मेथी गांव की महिला को बाघ ने मार डाला था। ग्रामीणों ने जंगल के बाहर हमला होने की बात कही पर विभागीय जांच में हमला कटरूआ बीनने के दौरान जंगल में करीब दो किमी अंदर पाया गया। घटनाओं के बाद लगातार तार फेंसिंग की मांग की जा रही है। इस मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है। सुरक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके अलावा, टाइगर रिजर्व में इस बार हमलों की संख्या में एकाएक इजाफा हुआ। नौ महीने में 15 लोगों की जान गई हैं। नरभक्षी घोषित हुए बाघ ने माधोटांडा क्षेत्र में कई को निशाना बना। जिसे वन विभाग की ओर से पकड़कर लखनऊ चिड़ियाघर भेजा जा चुका है।