जिले में 10,600 गर्भवती महिलाएं रक्त अल्पता (एनीमिया) का शिकार हैं। इसमें 371 गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की मात्रा सात ग्राम से भी कम है। यह खुलासा जिले में 27 जनवरी से चले मातृत्व सप्ताह के जांच के दौरान हुआ।
जिले में मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी लाने को सेहत महकमे द्वारा 27 फरवरी से तीन फरवरी तक मातृत्व सप्ताह का आयोजन किया गया था। इसके तहत प्रत्येक गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा आठ दिनों में जिले भर 17,119 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसमें 1611 गर्भवतियों को मुख्य जटिलता वाली महिलाओं के रूप में चिन्ह्ति किया गया। मुख्य जटिलता वाली महिलाओं के इलाज के लिए जिला और ब्लाक स्तर पर एचआरपी क्लीनिक स्थापित की गई। पांच फरवरी से 1604 गर्भवतियों का इलाज इन एचआरपी क्लीनिकों पर शुरू किया गया है।
371 गर्भवतियों में पाई गई बेहद जटिलता
मातृत्व सप्ताह में जांच के दौरान जिले की हजारों गर्भवती महिलाओं में खून की भारी कमी पाई गई। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 10,229 गर्भवती महिलाओं का हीमोग्लोबिन 11 ग्राम से कम, जबकि 371 महिलाओं में सात ग्राम से कम खून पाया गया।
मातृत्व सप्ताह के दौरान चिह्नित जटिलता वाली महिलाओं का इलाज एचआरपी क्लीनिकों पर किया जा रहा है। महिलाओं को कोई सुविधा न हो, इसको लेकर चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया गया है।
- डॉ. ओपी सिंह, सीएमओ