बीसलपुर और पूरनपुर में बेकाबू हुआ बुखार, सेहत महकमा फेल
न मुकम्मल इलाज दे पा रहे, न झोलाछाप पर कस रहे शिकंजा
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। ग्रामीण क्षेत्रों में मुकम्मल इलाज की व्यवस्था नहीं होने के कारण व झोलाछाप पर शिकंजा नहीं कसने की वजह से तेजी से बुखार का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इसे नियंत्रित करने में सेहत महकमा असफल साबित हो रहा है। करीब एक सप्ताह से जिले में फैले बुखार की वजह स्वास्थ्य विभाग और कोई नहीं, सिर्फ गांव-गांव फैली गंदगी मान रहा है। सीमएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल का कहना है कि कई गांव ऐसे है जहां अभी तक सफाई नहीं हुई हैं। सड़कें नालियां कीचड़ से भरी हैं। घरों में मच्छर उत्पात मचा रहे हैं। एक ठीक होता है तब तब दूसरा बीमार पड़ जाता है।
बुखार का प्रकोप पिछले सात दिन से पूरनपुर व बीसलपुर ब्लॉक में तेजी से बढ़ता जा रहा है। दोनों ही ब्लॉक के दर्जनों गांवों में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल कैंप लगाकर लोगों का उपचार देने का दावा किया जा रहा है। बावजूद बुखार पीड़ितों की संख्या कम होने नहीं का नाम नहीं ले रही। बीसलपुर क्षेत्र की बात करें तो यहां भोगापुर, रम्पुरा राना, चुर्रासकतपुर, राजपुर कुंडरी, दिवाली आदि गांव में दर्जनों लोग तेज बुखार की चपेट में है। यहां बुखार की वजह से पांच लोगों की मौत भी हो चुकी हैं। इसी तरह पूरनपुर ब्लॉक के उदरहा गांव में भी दर्जनों लोग बुखार की चपेट में आने से आज भी बीमार पड़े हैं। कहने को यह सीएचसी पीएचसी भी है। लेकिन ग्रामीणों को शायद ही इसका लाभ मिल पाता हो। इलाज के आभाव में स्वास्थ्य लोग झोलाछाप का सहारा लेने को मजबूर है। इतना ही नहीं घर-घर पहुुंचकर झोलाछाप लोगों को दवा देने के साथ ही उपचार कर रहे है।
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झोलाछाप पर एक साल में सिर्फ दो कार्रवाई
जिले में लगभग पांच हजार झोलाछाप इलाज कर रहें हैं, विभाग के आंकड़ों में पिछले एक साल में छापामारी कार्रवाई में सिर्फ दो ही झोलाछाप पूरनपुर व मझोला में मिले जिनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इनके अलावा करीब छह झोलाछापों को नोटिस जारी कर मामला समेट दिया गया। महकमे की इस कार्रवाई से अंदाजा लगाया जा सकता है कि झोलाछापों पर स्वास्थ्य विभाग किस कदर महरबान बना है।