गोमती नदी पर बढ़ सकती है पर्यटन की संभावनाएं
झील के सौंदर्यीकरण के साथ हो नौका बिहार की व्यवस्था
कैंटीन, पार्क और बच्चों के झूलों से भी बढ़ेगी रौनक
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मुनिराज सिंह
पीलीभीत। गोमती उद्गम से अविरल धारा बहाने के प्रयास शुरू होने के साथ ही यहां पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ गई हैं। यदि इसके तालाबों का सौंदर्यीकरण कर नौका बिहार की व्यवस्था, कैंटीन, पार्क आदि बना दिया जा तो न सिर्फ टाइगर रिजर्व आने वाले पर्यटक गोमती की ओर आकर्षित होंगे बल्कि मां पूर्णागिरि के दर्शन को जाने वाले श्रद्धालुओं को कुछ देर ठहरने के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है।
वाराणसी में गंगा में समाहित होने वाली गोमती नदी का उद्गम माधोटांडा की फुलहर झील से है, लेकिन उपेक्षा के चलते यह मृत प्राय: अवस्था पहुंच चुकी थी। अब एक बार फिर इसे पुनर्जीवित करने के भगीरथ प्रयास कुछ दिनों से शुरू हुए हैं। एक ओर अविरल धार बहाने को नदी क्षेत्र में मशीनों और मनरेगा से खुदान कराया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर झील को पानी देने के लिए देवीपुर माइनर से नाले की खुदाई भी कराई जा रही है। दो अप्रैल से शुरू हुए इस कार्य के कुछ दिन पहले से ही गोमती तट पर रौनक बढ़ने लगी है। वहीं गोमती की महिमा को देखते हुए डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा ने रोडवेज बसों एवं जंगल घूमने वालों के लिए टाइगर सफारी वाहनों का संचालन गोमती तट से शुरू कराने की पहल की है। इससे गोमती के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है और यहां पर्यटन की संभावनाएं भी दिखने लगी हैं। जानकारों का कहना है कि वर्तमान में नदी की मुख्य झील के ऊपर और नीचे के दोनों तालाबों को एक कर बड़ा तालाब (झील) बना दिया और इन तालाबों के बीच बने ह्यूम पाइप के पुलों को हटाकर बिना पिलर के बड़े पुल बना दिए जाए तो यह तालाब नौका बिहार का बेहतर विकल्प बन सकते हैं। इसके अलावा झील के पूर्वी तट पर कैंटीन, टाइगर रिजर्व के वाहनों की बुकिंग सेंटर एवं उत्तर पश्चिम की ओ बाग में पार्क बनाकर झूले आदि लगा दिए जाएं तो गोमती का सौंदर्य और निखर सकता है जो लोगों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करेगा।
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तालाबों में रंगीन पत्थरों की पिंचिंग
गोमती की मुख्य झील में प्राचीन समय की सीढ़ियां बनी हैं जबकि बाकी की तालाब कच्चे हैं। इन तालाबों के दोनों किनारों पर पत्थर लगाकर बांध दिया जाए साथ ही इसके दोनों ओर घूमने के लिए फुटपाथ और कुछ बेंचे लगाई की जा सकती हैं।