नेशनल ई-वे बिल एक अप्रैल से लागू हो गया है। अब बगैर नेशनल ई-वे बिल जनरेट किए एक राज्य से दूसरे राज्य में माल नहीं जा सकेगा। पकड़े जाने पर माल जब्त होगा और भारी जुर्माना के साथ छोड़ा जाएगा। अधिकांश व्यापारियों व डीलरों को नेशनल ई-वे बिल की पूरी तरह से जानकारी नहीं है। इसके चलते उनको दिक्कतें झेलनी पड़ रही है।
अधिकारी दावा कर रहे हैं कि नए सिस्टम से देशभर में माल परिवहन में आसानी होगी। पहले अलग-अलग राज्यों में ट्रांजिट पास, परिवहन मेमो समेत अलग-अलग व्यवस्थाएं थीं। कई तरीके के बिल वाहन चालकों को रखने पड़ते थे, जिससे माल परिवहन में राज्यों के बार्डर पर चेकिंग में बेवजह टाइम बर्बाद होता था। अब नए नियम के तहत नेशनल ई-वे बिल में माल परिवहन के दौरान वाहनों को राज्यों में बार-बार नहीं रोका जाएगा। किसी विशेष परिस्थिति में वाहन चेक हो सकता है। नेशनल ई-वे बिल में किसी भी तरह की गलती होने पर चौबीस घंटे के अंदर व्यापारी को उसे निरस्त कराना होगा। बिल की वैधता एक दिन में सौ किमी निर्धारित की गई है। बिल भेजने की जिम्मेदारी माल बेचने वाले व्यापारी की होगी।
नेशनल ई-वे बिल से जुड़ी जानकारियां
पचास हजार से कम कीमत के माल पर परिवहन पर ई-वे बिल की जरूरत नहीं होगी।
ई-वे बिल का ए पार्ट जनरेट कर लिया है तो पार्टी बी भरने की वैधता 115 दिन की होगी।
रास्ते में यदि वाहन बदलता है तो वैद्यता अवधि में वाहन का नंबर बदलने के लिए पार्ट बी भरना होगा।
सरकार ने ई-वे बिल की अनिवार्यता लागू कर दी है। ये ई-वे बिल विभाग की साइट से अपलोड किया जा सकता है। पंजीकरण में अगर किसी तरह की दिक्कत होती है तो व्यापारी कार्यालय में संपर्क करें उसकी हर संभव मदद की जाएगी।
देवेंद्र कुमार, असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्यकर विभाग