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12वें दिन भी गिरफ्त में नहीं आया खूनी बाघ

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पीलीभीत। तीन लोगों को मौत के घाट उतारने वाले खूनी बाघ की तलाश में जुटे वन विभाग के हाथ 12वें दिन भी खाली हैं। कई प्रयास के बाद भी बाघ के न मिलने से एक्सपर्ट भी थकने लगे हैं वहीं विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।
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वनकटी से निकलकर शहर में कचहरी के निकट से होता हुआ देवहा नदी को पार कर गया। बाघ ने अमरिया और जहानाबाद क्षेत्र में पड़ने वाले गांव में तीन किसानों पर हमला कर उन्हें मारा डाला था। 10 अगस्त को हुई तीसरी मौत से प्रशासन में हड़कंप मच गया। वन विभाग ने खूनी बाघ को पकड़ने के लिए लखनऊ, दिल्ली और दुधवा नेशनल पार्क से एक्सपर्ट बुलाए साथ ही अभियान चलाने को चार हाथी व एक ट्रैक्टर को भी लगाया गया। 11 अगस्त से चल रहे अभियान के दौरान बाघ वन विभाग द्वारा बांधे गए तीन पड्ढों को मार चुका है साथ ही एक बार नीलगाय का शिकार भी उसके द्वारा किया गया है। वन विभाग को उसके पद चिह्न भी मिले हैं लेकिन कई प्रयास के बाद भी बाघ ट्रैक्युलाइजिंग टीम के हत्थे नहीं चढ़ पा रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो बाघ हिमकनपुर के निकट ही घूम रहा है। प्रतिदिन उसके पदचिह्न मिल रहे हैं लेकिन काफी क्षेत्र में गन्ना, नरकुल एवं अन्य बड़ी घास व नदी का किनारा होने के चलते बाघ हत्थे नहीं चढ़ पा रहा है। अभियान का नेतृत्व कर रहे सामाजिक वानिकी के प्रभागीय निदेशक आदर्श कुमार ने बताया कि बाघ को पकड़ने की सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। बाघ को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
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