सीमावर्ती क्षेत्र में कम हुई तेंदुए की चहलकदमी
तीन दिन से नहीं हुए हमले और ना ही कैमरों में आई तस्वीर
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। सीमावर्ती क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने एक तेंदुए के सप्ताह भर पूर्व पिंजरे में कैद हो जाने के बाद से ही सक्रिय हुए साथी तेंदुए की चहलकदमी भी तीन दिन पूर्व से कम हो गई है। इलाके में ना तो कोई हमले की घटनाएं हुई और ना ही निगरानी को लगे कैमरे में तेंदुए की कोई तस्वीर कैद हुई।
बराही रेंज के अंतर्गत सीमावर्ती क्षेत्र बूंदीभूड़ समेत चार गांव की सीमा में लंबे समय से क्षेत्र में घूम रहे दो तेंदुओं का आतंक जारी रहा। एक सप्ताह पूर्व एक नर तेंदुए के पिंजरे में कैद हो जाने के बाद से ही उसका दूसरा साथी क्षेत्र में सक्रिय था। दूसरे तेंदुए की भी मौजूदगी के चलते अभियान में लगी टीम ने दूसरे पिंजरे को उस स्थान पर लगा दिया था। इसके बाद से ही दूसरे तेंदुए की लगातार पिंजरे के आस पास व आबादी क्षेत्र में चहलकदमी देखी जा रही थी। पिंजरे के समीप आए तेंदुआ पीछे की ओर से उसमें बंधी बकरी को भी खींच ले गया था। साथी तेंदुए की बढ़ती सक्रियता को देखते हुए टाइगर रिजर्व प्रशासन ने टीम को लगाकर तेंदुए की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। इधर तीन दिन पूर्व से क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता कम हो गई है। ना तो इलाके में कही हमले की घटनाएं सामने आई और ना ही निगरानी को लगे कैमरे में तेंदुए की कोई तस्वीर कैद हो सकी। ऐसे में टाइगर रिजर्व प्रशासन यह मान रहा है कि तेंदुआ पुन: जंगल क्षेत्र होता हुए नेपाल की ओर जा सकता है। नौजल्हा वन चौकी डिप्टी रेंजर गिरीश कुमार ने बताया कि पिछले तीन दिनों से तेंदुए की कोई गतिविधि क्षेत्र में नहीं देखी जा रही है। निगरानी को लगे कैमरे में भी तेंदुए की तस्वीर नहीं आई है। फिलहाल तेंदुए की निगरानी को लगातार गस्त की जा रही है।