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जंगल में अवैध आवाजाही रोकने में टाइगर रिजर्व प्रशासन फेल
मछली के शिकार से लेकर पशु तस्करी तक का गढ़ बनता जा रहा टाइगर रिजर्व का जंगल
निगरानी के नाम पर अफसरों को गुमराह करने में लगे जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। अधिकारी भले ही टाइगर रिजर्व में अवैध आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने और गंभीरता से लेकर चौकसी बढ़ाने के दावे करते आ रहे हों लेकिन रेंज के जिम्मेदार उनके दावों की हवा निकालने में लगे हैं। जंगल के अलग हिस्सों में मछली के शिकार समेत कई दूसरे गैरकानूनी धंधे बदस्तूर जारी हैं।
टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर व डिप्टी डायरेक्टर पद पर तैनाती के बाद जंगल की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद की जाने लगी है। अधिकारी भी जंगल सुरक्षा चाकचौबंद करने के लिए हर गतिविधियों पर नजर रखने के निर्देश भी दे रहे हैं, लेकिन जंगल में अवैध आवाजाही नहीं रुक सकी हैं। बराही रेंज के जंगल क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में मछली के अवैध शिकार का धंधा खूब फलफूल रहा हैं। शिकारी शारदा नदी के पार नेपाल की शुक्ला फांटा सेंचुरी तक मछलियों को मारकर वनकर्मियों की मिलीभगत से टाइगर रिजर्व के रास्ते ले जाकर बिक्री कर रहे हैं। वहीं बराही रेंज के ही राजपुर, फैजुल्लागंज क्षेत्र में न केवल मछली, बल्कि शिकारी अन्य जंगली जानवरों को भी मौके बेमौके निशाना बना लेते हैं। शिकार में मारी गई मछलियों को बाइक व पिकअप में लादकर बराही रेंज के लैहारी मार्ग के रास्ते वनकर्मियों के सामने ही ले जाया जा रहा है।
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प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम लकड़ी बीन रहीं महिलाएं
अधिकारियों के दावों के बावजूद जंगल से सटे इलाकों की महिलाओं का जंगल में लकड़ी बीनने का सिलसिला जारी हैं। सुबह चौका बर्तन करने के बाद महिलाएं जत्थे के रूप में जंगल में निकल जाती हैं और शाम तक लकड़ी को जंगल किनारे एकत्र करती हैं। शाम होते ही परिवार के अन्य सदस्यों के वहां पहुंचने के बाद ही उनकी मदद से एकत्र की हुई लकड़ियों को घर लाया जाता हैं। महिलाओं का जंगल तक पहुंचना जोखिम भरी बात है, और वनकर्मी इस पर कोई अंकुश नही लगा रहे हैं।
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जंगल मार्ग से जारी है पशु तस्करी
नेपाल से पशुओं की तस्करी का धंधा आज भी जारी है। तस्कर नेपाल से लाए जा रहे पशुओं को टाइगर रिजर्व मार्ग से लेकर निकल रहे हैं। उनके पास पशुओं को निकालने का एक मात्र सहारा टाइगर रिजर्व का जंगल ही है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जंगल की सुरक्षा के जिम्मेदार गश्त को कागजों में ही समेटकर अफसरों को गुमराह कर रहे हैं। खास बात यह हैं कि जंगल में वनकर्मियों की पशु तस्करों से कई बार मुठभेड़ भी होती है जिसे रिकार्ड में कम ही दर्ज किया जाता है।
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वर्जन
बराही रेंज के कुछ जगहों पर अवैध रूप से मछली के शिकार होने की जानकारी मिली हैं। इस मामले में मैं खुद जांच करूंगा, अगर जंगल में शिकार हो रहा हैं तो कार्रवाई की जाएगी। जंगल की सुरक्षा में चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। - आदर्श कुमार, डिप्टी डायरेक्टर, पीलीभीत टाइगर रिजर्व