साठगांठ के चलते फल-फूल रहा अवैध शिकार का धंधा
माधोटांडा। शारदा डैम की तलहटी में बसी पुरैना ताल्लुके महाराजपुर, रमनगरा और मठइया लालपुर मछली के अवैध शिकार के साथ प्रवासी पक्षियों के शिकार का गढ़ बनते जा रहे हैं। बताते हैं कि शारदा सागर डैम के इस क्षेत्र में चारे की अधिकता के चलते प्रवासी पक्षी यहां बहुतायत में पहुंच रहे हैं और शिकारी इसी का जमकर फायदा उठा रहे हैं। जिसके चलते यूपी और उत्तराखंड प्रवासी पक्षियों की कब्रगाह बनता जा रहा है।
शारदा डैम में अब तक मछली का नीलामी ठेका नहीं हो सका है। जिसके चलते यहां बड़े पैमाने पर मछली का अवैध शिकार हो रहा था, लेकिन ठंड बढ़ने और प्रवासी पक्षियों के आने के बाद शिकारियों ने इन मेहमान पक्षियों का भी अवैध शिकार करना शुरू कर दिया है।
शारदा डैम में पानी का लेबल घटने के बाद प्रवासी पक्षियों ने भी रात को ठहरने का स्थान (बसेरा) बदल दिया है। बताते हैं कि जिस क्षेत्र में चारे की अधिकता होती है प्रवासी पक्षी उसी इलाके को अपना वासस्थल बना लेते हैं। इसी के चलते डैम के जीरो किमी से चार किमी तक व आगे 17 किमी से 19 किमी तक चारे की अधिकता है और प्रवासी पक्षी भी तेजी से इस इलाके में अपना डेरा बनाने लगे हैं। सौल, खजरा आदि मछलियां भी पानी की कमी होने के चलते इसी इलाके में आ गई है। ठंड में महानगर एवं बंगाली कॉलोनी में मछलियों की डिमांड बढ़ जाती है। सौल मछली तो पंजाब में काफी ऊंचे दामों में सप्लाई की जा रही है। हाल ही में उत्तराखंड के वन महोलिया के तीन शिकारियों के पास से एक दर्जन मारे गए प्रवासी पक्षी बरामद किए गए, जिन्हें बाद में विभागीय केस काटने के बाद जुर्माना वसूल कर छोड़ दिया गया।
रमनगरा और उत्तराखंड की सीमा बनी शिकार का गढ़
पानी का लेवल घटने से जहां मछलियां पुरैना ताल्लुके महाराजपुर, मठइया लालपुर व रमनगरा की ओर अधिक आ गई, वहीं प्रवासी पक्षी भी इस तरफ और उत्तराखंड की सीमा क्षेत्र में बढ़ गए हैं। इन इलाकों में शिकारियों ने मछली का शिकार करने के साथ प्रवासी पक्षियों का भी अवैध शिकार तेजी से शुरू कर दिया है। पुरैना ताल्लुके महाराजपुर के सामने डैम में दोपहर होते ही शिकारियों की नावें देखी जा सकती हैं। अब तो आलम यह है कि डैम के किनारे ही मारे गए पक्षी बिक्री किए जा रहे हैं।
खाऊ कमाऊ नीति में फल फूल रहा अवैध धंधा
प्रवासी पक्षियों का शिकार साठगांठ होने के चलते और भी तेजी से बढ़ा है। बताते हैं कि वन समेत दो महकमों के कर्मचारियों ने तो नाव चलाने वाले शिकारियों से बाकायदा फिक्स रकम तय कर रखी है। इसी के चलते दिन में ही खुलेआम अवैध शिकार हो रहा है। वहीं मारी गई मछलियां पेटियों में रखकर खटीमा व पीलीभीत में सप्लाई की जा रही हैं। यदि कभी कोई शिकायत करता भी है तो वनकर्मी व पुलिस डैम में घुसकर शिकारियों को पकड़ने को कोई साधन न होने की बात कहकर अपना पल्लू झाड़ लेते हैं।
टाइगर रिजर्व में मछली का शिकार नहीं हो रहा है। प्रवासी पक्षियों की आमद के बाद से ही इस पर बाकायदा पैनी निगाह रखी जा रही है। शारदा सागर डैम में मत्स्य निगम की जिम्मेदारी है। यदि कहीं कोई अवैध शिकार का मामला प्रकाश में आता है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अनिल शाह, वन क्षेत्राधिकारी, बराही