-बेटे के हत्यारोपी पति की सजा पर एक मां को मिला न्याय
पीलीभीत।
एक मां ने बेटे के हत्यारोपी अपने ही पति को सजा दिलाने के लिए आठ महीने तक कानूनी लड़ाई लड़ी। पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने पर ममता देवी ने न्यायालय के फैसले का स्वागत किया। उसने कहा कि आज उसकी लड़ाई मुकाम पर पहुंच सकी है। बकौल महज उसके पति ध्रुव कुमार ने मासूम बेटे प्रिंस की हत्या स्कूल की फीस मांगने पर हुए झगड़े के बाद बांका से गला रेतकर की थी।
पूरे घटनाक्रम को बयान करते हुए दियोरियाकलां क्षेत्र के ग्राम बिहारीपुर हीरा गांव निवासी ममता ने बताया कि उसके दो बेटों में तब 16 वर्षीय प्रिंस बड़ा था। प्रिंस कक्षा सात में पढ़ाई कर रहा था। इसी साल 14 मार्च को उसने स्कूल की फीस के लिए पिता से रुपये मांगे। इतना सुनते ही पिता ने उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। बीच-बचाव कराने पर ममता को भी पीट दिया। दो दिन बाद प्रिंस की इसी विवाद के चलते पिता ने बांका से गला रेतकर हत्या कर दी थी। एक तरफ बेटे का शव पड़ा तो वहीं पिता फरार हो चुका था। बेटे की हत्या से टूट चुकी मां ने आरोपी पति को सजा दिलाने के लिए बमुश्किल हिम्मत जुटाई और पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। आठ माह से लगातार बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ती रही और अंत में उसको न्याय मिल ही गया। मंगलवार शाम को अमर उजाला से बातचीत के दौरान हत्यारोपी पिता को हुई आजीवन कारावास एवं 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा का उसने स्वीकार किया है।
मेहनत कर छोटे बेटे को शिक्षित कर रही ममता
प्रिंस की हत्या के बाद नौ साल का छोटा बेटा अरिवेश ही ममता का सहारा है। बड़े बेटे को खोने और उसकी हत्या के जिम्मेदार पति को जेल की सलाखों तक पहुंचाने के बाद वह छोटे बेटे अरिवेश को एक बेहतर कल देने की कोशिश में जुट गई। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत न होने पर कच्चे मकान में गुजर बसर के दौरान सामने आने वाली परेशानियों का भी डटकर मुकाबला कर रही है। इसके लिए ममता चार बीघा जमीन पर खेती कराने के साथ ही खुद दूसरों के कपड़ों की सिलाई करने और पोलियो अभियान में ड्यूटी करके परिवार की जीविका चला रही है। बेटा अरिवेश गांव के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा तीन की पढ़ाई कर रहा है। ममता ने कहा कि अब बेटे को बेहतर शिक्षा देकर एक बड़े मुकाम पर पहुंचाना, उसके जीवन का लक्ष्य बन गया है।