जिले की बीस लाख आबादी पर सिर्फ 42 डॉक्टर
बजट करोड़ों का फिर भी धरालत पर नहीं दिखतीं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं
कर्मचारियों और संसाधनों की कमी से भी जूझ रहे अस्पताल
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। करोड़ों की धनराशि का बजट खपाने वाले सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर है। बीस लाख की आबादी की जिम्मेदारी महज 42 डॉक्टरों के कंधे पर है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी होती जा रही है। स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि जिले में सभी योजनाओं का ठीक तरह से संचालन हो रहा है।
शासन ने डॉक्टरों को पीएचसी, सीएचसी पर ठहरना तो अनिवार्य कर दिया लेकिन जिले में इसका पालन कोई डॉक्टर नहीं कर रहा है। कई बार अधिकारियों के स्थलीय निरीक्षण में इसकी पोल खुल चुकी है। मुख्यालय के जिला और महिला अस्पताल पर प्रतिदिन हजारों मरीजों का लोड रहता है। सरकारी चिकित्सकीय सेवाओं की चर्चा करें तो जिले में आठ सीएचसी, 20 न्यू पीएचसी, एक ब्लॉक लेबल पीएचसी, 199 सब सेंटर स्थापित किए गए हैं। स्वीकृत 107 डॉक्टरों के पदों पर सीएमओ, सीएमएस आदि जिला स्तरीय अधिकारियों को छोड़कर केवल 42 डॉक्टर कार्यरत हैं। नर्स/एएनएम के लगभग सवा दो सौ स्वीकृत पदों में मौजूदा की स्थिति 133 है। आबादी के हिसाब से पांच हजार पर सब सेंटर, तीस हजार पर पीएचसी और एक लाख पर सीएचसी होनी चाहिए। अस्पतालों में मूल सुविधाएं तो सब हैं लेकिन इन्हें संचालित करने के लिए डॉक्टरों का ही टोटा है। पैरा मेडिकल स्टाफ भी कम है। एनएचएम की दर्जन भर योजनाओं का संचालन भी केवल संविदा स्टाफ द्वारा ही कराया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो सेहत महकमे में राजनीतिक हस्तक्षेप डॉक्टरों के लिए सिरदर्द बन चुका है। पीएचसी, सीएचसी पर जो डॉक्टर नेता का रिश्तेदार होता है, वह अस्पताल नहीं आता। ऐसे में जो डॉक्टर वहां ड्यूटी कर रहा होता है उस पर सबसे ज्यादा लोड होता है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी अधिकांश स्थानीय होते हैं इसलिए उन्हें भी किसी न किसी लोकल नेता का संरक्षण रहता है।
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जिले की कुल आबादी : 20,37225
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र : 8
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र : 21
सब सेंटर : 199
एमबीबीएस चिकित्सक : 42
एएनएम : 133
आशा : 1400
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वर्जन
लंबे समय से डॉक्टरों की कमी जिले में बनी हुई है। योजनाओं का संचालन विधिवत चल रहा है। पीएचसी-सीएचसी पर डॉक्टर वहीं रुकते हैं। समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है। डॉक्टरों और स्टाफ की तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है। - डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ