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आईएमए की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेपटरी

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आईएमए की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं हुई बेपटरी
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क्रासर...
प्राइवेट अस्पतालों व क्लीनिकों की ओपीडी सेवाएं रही बंद
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अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। नेशनल कमीशन बिल के विरोध में शनिवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गई। ओपीडी बंद होने से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। डॉक्टरों ने आईएमए भवन में बैठक की और कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने शुक्रवार को बिल के विरोध में शनिवार को हड़ताल की घोषण की थी। आईएमए के कॉल फार एक्शन के आह्वान पर शनिवार को आईएमए से जुड़े चिकित्सक हड़ताल पर रहे। हड़ताल के चलते आईएमए डाक्टरों ने ओपीडी सेवाओं को पूरी तरह से बंद रखा। आईएमए भवन में तमाम डाक्टर एकत्र हुए और बिल के विरोध में चर्चा करते हुए कहा कि यदि सरकार जनविरोधी और अमीरों के हितों को साधने वाले गैर लोकतांत्रिक एनएमसी विधेयक को लागू करेगी तो आईएमए अपने आंद0ोलन को तेज करने के लिए मजबूर होगा। कहा कि निजी मेडिकल कॉलेजों में पचास प्रतिशत सीटें सबसे ज्यादा बोली लगाने वालों की होती है। आइएमए का मुद्दा आम आदमी का मुद्दा है, इसके लिए समाज में जागरूकता कायम करने की आवश्यक्ता है। बैठक के बाद आईएमए अध्यक्ष डॉ विपिन साहनी के नेतृत्व में डाक्टरों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम डॉ अखिलेश मिश्रा को सौंपा। ज्ञापन में नेशनल कमीशन बिल पर पुर्नविचार करने की मांग की गई है। ज्ञापन देने वालों में सचिव डॉ सौरभ अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष केएन तिवारी, डॉ रश्मि समेत आईएमए से जुड़े कई चिकित्सक मौजूद रहे।
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ओपीडी बंद होने से भटके मरीज
जिले में आईएमए से जुड़े करीब 80 डाक्टर हैं। आईएमए डाक्टरों की हड़ताल के दूर दराज से दवा लेने शहर पहुंचे तमाम मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शनिवार सुबह से ही अस्पतालों के सामने मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई। बाद में जब हड़ताल के चलते ओपीडी सेवा बंद होने से उन्हें जानकारी हुई तो वे वापस लौट गए। फिलहाल पूरे दिन प्राइवेट अस्पतालों, क्लीनिकों के बाहर तमाम मरीज डाक्टरों का इंतजार करते देखे गए।
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