शारदा डैम के सामने रमनगरा बुझिया क्षेत्र में वर्षों पूर्व कटान रोकने को बनाई गई पत्थर की चार ठोकरें बीते 48 घंटे के भीतर कटान के चलते नदी की भेंट चढ़ गईं। विभाग द्वारा बचाव कार्य के लिए यहां बैंबू कटर लगवाए जाने का काम तेज कर दिया गया था, लेकिन मिट्टी की कमी के चलते गुरुवार को यहां बाढ़ खंड द्वारा कराया जा रहा बचाव कार्य ठप रहा।
एक सप्ताह पूर्व पहाड़ों पर हुई भारी वर्षा के बाद शारदा का जल स्तर काफी बढ़ गया था। नदी ने पहले रमनगरा के स्पर संख्या छह को अपने निशाने पर लिया लेकिन गनीमत रही कि नदी ने यहां कोई ज्यादा नुकसान नहीं किया। अब नदी ने रमनगरा बुझिया को अपने निशाने पर लिया है। यहां शारदा की तबाही को रोकने के लिए वर्षों पूर्व बनी पत्थर की चार ठोकरें भी बीते 48 घंटे के भीतर नदी की भेंट चढ़ गईं। कटान की स्थिति को देखतें हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने आननफानन में ठेकेदारों को यहां बचाव कार्य कराने के लिए लगाया। ठेकेदार मजदूरों से अपनी देखरेख में बैंबू कटर बनवाकर उसमें बोरो में रेत भरकर डलवाना शुरू कर दिया था, लेकिन गुरुवार को रेत व मिट्टी न होने से यहां कराया जा रहा बचाव कार्य ठप रहा। इससे लोगों में रोष है।
ग्रंथी ने विभाग को ठहराया दोषी
वर्षों पूर्व शारदा की तबाही को रोकने के लिए रमनगरा निवासी बाबा कृपाल सिंह ने बताया कि अपने गुरू के नेतृत्व में कार सेवा कर ठोकरें यहां बनवाई थीं, लेकिन उस दौरान कटान काफी तेज होने के चलते ठोकरें नदी में समा गईं थी। इसके बाद सिख संगत के काफी जोर डालने पर शासन ने यहां लगभग डेढ़ दर्जन पत्थर की ठोकर को बनवाया था। ठोकरें बन जाने से नदी यहां से बाए किनारे की ओर चली गई थी और किसानों ने यहां खेती करनी भी शुरू कर दी थी, लेकिन नदी एक बार फिर दाएं किनारे की ओर आ गई। नदी की मुख्य धार पत्थर की ठोकरों पर पड़ने लगी थी जिससे धीरे धीरे चार ठोकरें नदी में समा गईं। उनका आरोप है कि बरसात से पूर्व बाढ़ खंड यहां कोई स्थायी कार्य करा देता तो यह विशाल ठोकरें नदी की भेंट न चढ़ती।