खेकड़ा (बागपत)।
क्षेत्र के ग्राम डूंडाहैड़ा के समीप स्थित जय शांति सागर निकेतन जैन मंदिर में मुनि कीर्ति सागर जी महाराज की तृतीय समाधि दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। साथ ही ऐलक विज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन का अंतिम लक्ष्य मरण ही होता है।
ग्राम डूंडाहैड़ा के समीप स्थित जय शांति सागर निकेतन जैन मंदिर में रविवार को मुनि कीर्ति सागर महाराज की तृतीय समाधि दिवस पर ऐलक श्री विज्ञान सागर जी महाराज के सानिध्य में कार्यक्रम का आयोजन किया । इस दौरान श्रद्धालुओं ने कार्यक्रम में भाग लेकर दिवंगत मुनि कीर्ति सागर जी महाराज को तृतीय समाधि दिवस पर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में जैनाचार्य श्री ऐलक विज्ञान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में कहा कि मुनि की तपस्या अत्यधिक कठिन होती है और जीवन का अंतिम लक्ष्य मरण होता है। तपस्वी का जीवन समाधि मरण से होता है, जो इस तपस्वी जीवन से समाधि मरण में बदल जाता है। इसके चलते तपस्वी समाधि मरण से ही नर से नारायण बन जाता है, जो भी मुनि संत अपने लक्ष्य से भटक जाता है, उसे कभी भी भगवान की प्राप्ति नहीं हो सकती। कीर्ति सागर महाराज ने चालीस से भी अधिक वर्षों तक कड़ी तपस्या की। तपस्या के बाद उन्हें सूत सागर महाराज से क्षुल्लक की दीक्षा प्राप्त हुई। गत तीन वर्ष पहले मकर संक्रांति के दिन ही उन्होंने समाधि ली थी। साधु संतों की संगति में रहकर उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही मानव कल्याण संभव है। इस दौरान प्रवीन जैन, नवीन कुमार जैन, अमन जैन, नरेश चंद जैन, अरविंद्र जैन, ललिता जैन, शोभा जैन, संजय जैन, अंकुश जैन, मोहित जैन, राजेश जैन, आकाश जैन, मनोज जैन, अरूण जैन, साहिल जैन, दिनेश जैन, नितिन जैन, अमित जैन, दीपक जैन आदि रहे।