जाम में फंसे वाहनों से निकलने वाला धुआं बन रहा मुसीबत का सबब
शहर के प्रमुख बाजारों में रोज घंटों लगने वाला जाम लोगों को परेशान तो करता ही है, बीमार भी बना रहा है। वजह यह है कि जाम के कारण बाजार में घंटों खड़े वाहन जहरीला धुआं उगलते रहते हैं। चूंकि व्यापारियों ने आधी से ज्यादा सड़कों पर अपना सामान रख अतिक्रमण कर रखा है। ऐसे में सड़कें संकरी होने से वाहनों का जाम में फंसना लाजिमी है। अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह व्यापारी भी अपने स्वार्थ में यह समझना ही भूल गए कि जाम में फंसे वाहन जो जहरीला धुआं उगल रहे हैं, वह इन्हें धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों के मकड़जाल में घेरता जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति करीब सात से आठ साल तक इस जहरीले धुएं के संपर्क में रहता तो वह डिप्रेशन से लेकर कैंसर जैसी घातक बीमारियों का भी शिकार हो सकता है।
इंट्री प्वाइंट कोई भी हो, जाम से तो जूझना ही पड़ेगा
जैसे-जैसे शहर की आबादी बढ़ती गई, जाम की समस्या भी बढ़ती गई। शहर में यदि असम हाईवे की ओर से प्रवेश करें तो मंडी समिति रोड पर जाम की समस्या से दो चार होना लाजिमी है। ईदगाह रेलवे क्रॉसिंग से आने पर लकड़ी मंडी व जेपी रोड पर दुकानों के बाहर रखा सामान जाम का सबब बन रहा है। माधोटांडा रोड से प्रवेश करने पर गौहनिया रेलवे क्रॉसिंग से लेकर चौराहा तक सड़क किनारे व्यापारियों ने कब्जा जमा रखा है। शहर के भीतर सड़कों के हाल पर गौर करें तो स्टेशन रोड, स्टेडियम रोड, जेपी रोड पर लगने जाम का कारण सड़कों के किनारे रखा गया सामान ही है। व्यापारी सड़कों को अपनी पैतृक संपत्ति मानकर आधी-आधी सड़कों पर रोजाना ही सामान सजाते देखे जा सकते हैं और यही सड़कों पर रखा गया सामान दिन में कई-कई बार जाम का सबब बन रहा है।
वाहनों के जहरीले धुएं से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं व्यापारी
जाम में फंसे वाहन वायु प्रदूषण का अच्छा खासा स्रोत माने जाते हैं। शहर में स्टेडियम रोड के अलावा स्टेशन रोड पर थाना सुनगढ़ी तिराहे से ड्रमंडगंज चौराहे तक व पूरे जेपी रोड तक एक दिन में करीब 20 से 25 बार जाम लगना आम बात है। बात जाम तक ही सीमित नहीं है। इस जाम में फंसे सैकड़ों वाहन जो जहरीला धुआं उगल रहे हैं, उससे जाम में फंसे लोग ही नहीं बल्कि वे व्यापारी भी प्रभावित होते हैं, जिनकी सड़कों के किनारे दुकानें हैं। देखा जाए तो जहरीले धुएं से व्यापारी ही सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। उन्हें करीब सात से आठ घंटे तक इसी प्रदूषित वातावरण में सांस लेनी पड़ती है।
वाहनों से 25 से 36 फीसदी होता है वायु प्रदूषण
डीएनए क्लब के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत शर्मा के मुताबिक सड़कों पर धूल, ट्रक व दोपहिया वाहनों से कार की अपेक्षा वायु प्रदूषण ज्यादा होता है। सड़कों पर धूल के कारण 35 प्रतिशत वायुप्रदूषण होता है, जबकि वाहनों से 25 से 36 प्रतिशत तक वायु प्रदूषण होता है।
आठ घंटे तक रहते हैं प्रदूषित वातावरण में
शहर के प्रमुख चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ. अमित कुशवाहा के मुताबिक ज्यादातर वाहनों से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाईआक्साइड व कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ शामिल होते हैं। वाहनों का जहरीला धुंआ सांसों के जरिए फेफड़ों तक पहुंचता है। बच्चों को फेफड़ों के जितने संक्रमण होते हैं, उनमें से 10 प्रतिशत, प्रदूषित हवा में मौजूद छोटे-छोटे कणों से होता है। शहर में जिन स्थानों पर जाम की समस्या ज्यादा है, वहां के व्यापारी अन्य लोगों की अपेक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। एक अनुमान के यदि कोई व्यापारी सात से आठ घंटे ऐसे प्रदूषित वातावरण में रहता है तो उसके शरीर को 40 से 45 सिगरेट पीने के बराबर नुकसान होता है।
प्रदूषण नई पीढ़ी को कर रहा है खोखला
वायु प्रदूषण के लिए हम खुद ही जिम्मेदार हैं। यदि व्यापारी अपना सामान दुकानों के बाहर न रखे तो जाम की समस्या से निजात पाई जा सकती है। खास बात यह है कि यह प्रदूषण हमारी नई पीढ़ी को बीमार कर रहा है।
मंजीत सिंह, व्यापारी
वाहनों के धुंए से बैठना हुआ मुश्किल
शहर में जाम की समस्या आए दिन होती है। सड़क किनारे बेतरतीब खड़े वाहनों व अस्थाई अतिक्रमण के कारण ही जाम लगता है। जाम मेें फंसे वाहनों से निकलने वाले धुएं से दुकान में बैठना दूभर हो गया है। इससे हम सभी विशेषकर छोटे बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।
नरेंद्रपाल सिंह, व्यापारी