जिले में धान खरीद का काम शनिवार से बंद हो गया। इस सीजन में 2.78 लाख मीट्रिक टन धान खरीद गई जो कुल लक्ष्य 80 प्रतिशत खरीद है। वहीं धान खरीद के अपेक्षा चावल का उतार नहीं हो रहा है। राइस मिलों पर 50 हजार मीट्रिक टन से अधिक चावल जमा हैं।
शासन ने इस बार 15 सितंबर से धान खरीद करने के निर्देश देकर जिले को 3.46 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया था। प्रारंभ में कुछ दिन धीमी चली में करीब डेढ़ माह बाद तेजी आई जिससे सरकारी खरीद का आंकड़ा लगातार बढ़ता गया। 30 दिसंबर को सरकारी धान खरीद का काम बंद हो गया। इस दौरान जिले में 2.78 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। जिले में हुई यह खरीद कुल लक्ष्य का लगभग 80 प्रतिशत है। हालांकि जिले में हुई इस धान खरीद का लाभ किसानों को न मिलकर मिलर्स और बिचौलियों को ही हुआ। मिलों द्वारा खरीदे गए धान को किसानों के नाम दर्ज कर जमकर बंदरबाट हुई। उधर धान खरीद की सापेक्ष तैयार धान का उतार अभी नहीं हो पा रहा है। खरीदे गए धान से मिलों द्वारा अभी तक 1.81 लाख एमटी चावल तैयार किया जा चुका है जिसमें मात्र 1.32 लाख एमटी का उतार ही राजकीय भंडारों में हुआ है। मिलों पर अभी भी 48.68 लाख एमटी चावल बकाया है। डिप्टी आरएमओ डॉ. अविनाश कुमार झा ने बताया कि धान खरीद पूरी हो चुकी है। कुछ क्रय केंद्रों के आंकड़े लेकर अंतिम रिपोर्ट तैयार की जा रही है। चावल उतार के प्रयास किए जा रहे हैं।