पीलीभीत। प्रदेश सरकार के 50 साल से अधिक के अधिकारी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के फैसले पर कर्मचारी संयुक्त परिषद ने विरोध जताया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कर्मचारियों ने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है।
उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हशमुद्दीन खां एवं मंत्री संजय सक्सेना की ओर से प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का तुगलकी फरमान किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सरकार के यह एक तरफा फैसला कर्मचारियों के हित में नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि कर्मचारियों की कार्य क्षमता मापने के लिए सरकार के पास पारदर्शी तंत्र तक नहीं है जो लोग इसके लिए नियुक्त किए जा रहे हैं खुद उनकी कार्यक्षमता को कैसे मापा जाएगा। आशंका व्यक्त की गई है कि इस प्रक्रिया से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों का शोषण होगा। अधिकारी अपने अधीनस्थों को प्रतिकूल प्रविष्टि देंगे जिससे उनका वार्षिक चरित्र प्रविष्टियां प्रभावित होंगी। कर्मचारी परिषद ने सरकार के इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
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कर्मचारी परिषद की बैठक कल
पीलीभीत। उप्र राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष हशमुद्दीन खां ने बताया कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए दो अगस्त को शहर के एक होटल में बैठक बुलाई गई है। इसमें आंदोलन की रणनीति बनाने के साथ सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा।