पीलीभीत। ग्राम पंचायतों में पथ प्रकाश व्यवस्था के लिए लगाई गईं घटिया सोलर लाइटों के खराब होने के बाद अब इनकी मरम्मत को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है। विभाग व इससे संबद्ध कार्यदायी संस्थाओं से खरीद नहीं किए जाने पर नेडा के अधिकारियों ने लाइटें ठीक कराने से किनारा कर लिया है। स्पष्ट कहा कि लाइटों से हमारा कोई मतलब नहीं है। जिस ठेकेदार द्वारा लाइटें लगवाई गई हैं वह ही उसमें सुधार कराए। बता दें, ग्रामीण अंचलों में बिजली कटौती की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए करीब तीन साल पहले सोलर लाइट लगाने की कवायद शुरू हुई। इस दौरान जिले की 721 ग्राम पंचायतों में ग्राम निधि से चार हजार से ज्यादा सोलर लाइटें लगाई गईं। कुछ पंचायतों में पांच से दस तो कुछ में 25 से 40 सोलर लाइट नियमों को ताक पर रखकर प्रधान व सचिव से साठगांठ कर ठेकेदार ने लगवा दी। इनमें अधिकांश घटिया क्वालिटी की लाइटें बाजार से डेढ़ गुना दाम पर लगाई गईं। बाजार में जिस सोलर लाइट की कीमत 13 से 15 हजार रुपये बताई गई, उसका 21 से 22 हजार की दर से ठेकेदार को भुगतान कर दिया गया। बिलसंडा, बीसलपुर, मरौरी व ललौरीखेड़ा ब्लॉक में लगाई गई सोलर लाइटों के खराब होने की सबसे अधिक सर्वाधिक शिकायतें नेडा कार्यालय पहुंच रही हैं। नियमानुसार ग्राम पंचायतों में नेडा व इससे संबद्ध कार्यदायी संस्थाओं से सोलर लाइटों की खरीद किए जाने का प्रावधान है, लेकिन कमीशनखोरी के चक्कर में सभी नियमों को ताक पर रखकर मनमानी कर लाइटें लगवा दी गईं। हर माह तीस से अधिक शिकायतें नेडा कार्यालय पहुुंच रही हैं। वहीं नेडा के अधिकारियों ने विभाग व इससे संबद्ध कार्यदायी संस्थाओं से खरीद नहीं किए जाने पर इस मामले से किनारा कर लिया है।
नियमानुसार ग्राम पंचायतों में नेडा व इससे संबद्ध एजेंसी से ही सोलर लाइटों की खरीद की जानी चाहिए। खराब सोलर लाइटें ठीक कराने के साथ ही किस रेट में इनकी खरीद दर्शाकर भुगतान किया गया। इसकी जांच कराई जाएगी।
राजीव बनकटा, सीडीओ