19 पीबीटीपी 28 से 30 तक
धूं-धू कर जल उठा बुराई के प्रतीक रावण का पुतला
रामलीला में रावण वध लीला देखने को उमड़ी भारी भीड़
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। श्री रामलीला महोत्सव संचालन समिति के तत्वावधान में चल रहे रामलीला मेले में रावण वध लीला देखने को शहर समेत आसपास क्षेत्रों की भारी भीड़ उमड़ी। देर शाम रावण के पुतले का दहन किया गया।
शहर के रामलीला मैदान में शुक्रवार को सदर विधायक संजय सिंह गंगवार और डीएम डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने प्रभु राम के स्वरूप को विजय तिलक लगाकर मंचन का शुभारंभ किया। मेले में मंचन के दौरान दिखाया कि लंकापति रावण को मंदोदरी समझाती है कि राक्षसराज अब भी समय है, राम लक्ष्मण कोई साधारण पुरुष नहीं हैं। उनके दिव्य बाणों से मेघनाद, कुंभकरण, नरांतक, अहिरावण, अतिकाय, त्रिशिरा मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं। इस पर रावण क्रोधित हो उठता है और युद्ध स्थल पर जा पहुंचता है। यह देख विभीषण प्रभु राम से बोले कि आपके पास न तो दिव्य रथ है और न ही कवच, युद्ध कैसे करेंगे। प्रभु राम बोले जिस रथ से विजय प्राप्त होती है वह दूसरा ही है। शौर्य और धैर्य उस रथ के पहिए, सत्य और शील उसकी ध्वजा, बल, विवेक, दम और परोपकार ये चार उसके घोड़े हैं। ऐसा धर्म रथ जिसके पास हो, उसको किसी दिव्य रथ की आवश्यकता नहीं होती। दोनों ओर से युद्ध शुरू हो जाता है। प्रभु राम वाणों से रावण के शीश व भुजाओं को काटने लगते हैं, लेकिन शीश व भुजाएं फिर से जुड़ जाते हैं। विभीषण राम को रावण की नाभि में अमृतवास की जानकारी देते हैं। इस पर प्रभु राम अगस्त मुनि द्वारा दिए गए अग्निबाण से रावण पर प्रहार करते हैं। अग्निबाण नाभिकुंड के अमृत को सोख लेता है और रावण मरणासन्न अवस्था में जमीन पर गिर पड़ता है। इसके साथ ही रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले धूं-धूं कर जल उठते हैं। पूरा मैदान भगवान राम के जयकारों से गूंज उठता है। इससे पूर्व विधायक समेत प्रशासनिक अफसरों ने रावण के दस सिरों के प्रतीक गुब्बारों को उड़ाया। आतिशबाज हनीफ ने आतिशबाजी का कार्यक्रम पेश किया। इस मौके पर महंत ओमकार नाथ, सुनील मिश्रा, प्रेम सिंह, नरेश शुक्ला, केशव सक्सेना, रमाकांत पांडे, अमरीश शर्मा, भानुप्रताप सिंह, अमिताभ त्रिपाठी, संजीव मिश्रा, अजय सक्सेना, रमाकांत शर्मा, अमित अग्रवाल, निरंजन शर्मा, प्रतीक अग्रवाल, राजकुमार भारती, धीरेंद्र मिश्र, अंशुमान मिश्रा, मनोज गुप्ता आदि मौजूद रहे।