खेकड़ा (बागपत)। एसीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने कहा बरसात के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा 15 साल तक के बच्चों को एएफपी का सबसे से अधिक खतरा होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 15 साल तक के बच्चों को एएफपी (एक्यूट फ्लैसिट पैरालिसिसद्ध) से बचाने के लिए सीएचसी में शुक्रवार को विशेष कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें बच्चों में होने वाली अचानक लकवा रोग पर चर्चा की। एसीएमओ डॉ. नीरज त्यागी ने बताया कि बरसात के मौसम में एएफपी से पीड़ित बच्चों की संख्या अधिक देखने को मिलती है, क्योंकि इसका वायरस बरसात में पानी के माध्यम तेजी से फैलता है। समय पर उपचार के जरिये इस रोग से बचा जा सकता है। उन्होंने बताया कि एएफपी से पीड़ित रोगी की सूचना तुरंत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दी जानी चाहिए। इससे समय रहते रोग का निर्धारण कर उसका समय पर उपचार किया जा सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एसएमओ डॉ. अभिषेक ने बताया कि बीमारी से ग्रसित बच्चे जब खुले में शौच करते हैं तो बरसात के पानी से इस बीमारी के वायरस स्वस्थ बच्चों को प्रभावित कर देते हैं। इसकी वजह से बच्चों शरीर के किसी भी अंग में निशक्तता आ सकती है। यह एक तरह से पोलियो का ही एक प्रकार है। उन्होंने कहा कि देश में बीते कुछ सालों में पोलियो को कोई रोगी नहीं पाया गया है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरविंद मलिक ने कहा कि पड़ोसी देशों में पोलियो के केस पाए जा रहे हैं। इन देशों को जिले के लोगों का आना जाना लगा रहता है। इस वजह से इसके वायरस के आने की संभावनाएं बनी रहती हैं। पोलियो की तरह दिखने वाली यह बीमारी एएफपी अभी भी है। कार्यशाला में खेकड़ा चिकित्सक परिषद के अध्यक्ष डॉ. जगपाल सिंह, डॉ., अनवार अहमद, डॉ. लोकेश गुप्ता, डॉ. जयप्रकाश सिंघल, डॉ. अभिषेक शर्मा, डॉ. सलीम अहमद, डॉ. सतीश कुमार, डॉ. सुनीता सोनल, डॉ. दीप्ति चौधरी, डॉ. शाजिया खान, डॉ. गौरव वर्मा, बीपीएम रूपेंद्र शर्मा आदि मौजूद रहे।